“आतंक से जारी है लड़ाई”


गोवा की राजधानी पणजी में 16/10/2016 को ब्रिक्स समिट सम्प्पन हुई। पांच देशों के इस सम्मेलन में तमाम आपसी और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई, साथ ही आपसी सहयोग को नई ऊंचाई देने के उपायों पर भी सदस्य देशों ने प्रमुख बातें की। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की सदस्य देशों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें भी हुई।

पांच देशों, ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका का ग्रुप ब्रिक्स, की कुल जीडीपी दुनिया की जीडीपी का 23.1% है। साथ ही यह समूह दुनिया की 43% आबादी का रिप्रेजेंट करता है। दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का ब्रिक्स सम्मेलन भारत में होने से पूरी दुनिया की नजरें इस बार हम पर टिकी रही।

इस सम्मेलन में कारोबार एवं निवेश बढ़ाने और आतंकवाद के खतरे से मुकाबले जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गयी। इस सम्मेलन में भारत ने, आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कवायद जारी रखते हुए अपना कूटनीतिक हमला तेज किया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने नाम न लिए बगैर कई बार आतंक समर्थक पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला।

पीएम नरेंद्र मोदी जी ने दो दिन के समिट में सीमा पार आतंकवाद फैलाने के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहरते हुए कहा…..”हमारा एक पड़ोसी देश आतंकवाद को पालने-पोसने में लगा है।” और “आतंकवाद हमारे पड़ोसी देश का दुलारा बच्चा बन गया है और अब यही बच्चा अपने मां-बाप के नेचर के बारे में बता रहा है।”

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने भी पीएम मोदी ने एनएसजी सदस्यता और मसूद अजहर का मामला उठाया। दो दिन के समिट में भारत का पूरा जोर आतंकवाद के मुद्दे पर रहा। लेकिन चीन की वजह से ब्रिक्स के ज्वाइंट डिक्लेरेशन में सीमा पार आतंकवाद और लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकी संगठनों का जिक्र करने पर सहमति नहीं बन पाई।

विकास की धारा में आतंकवाद एक बड़ा अवरोध है, और इसी वजह से भारत ने हर स्तर पर आतंक के समर्थकों के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी है। भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि, आतंक के खिलाफ केवल निंदा करने का समय अब गया, यह कार्रवाई का समय है। उरी हमले के बाद, भारत की तरफ से आतंक के आका पकिस्तान के खिलाफ अब बड़ी मुहीम छेड़ी जा चुकी है। और फिर भी अगर पकिस्तान अपनी हरकतों से बाज़ नही आता है, तो फिर आर-पार की लड़ाई होगी, जिसमे पकिस्तान का नामो-निशान मिटा दिया जाएगा।

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