हमारे कदम, ऊँचे राष्ट्रीय चरित्र की ओर


अफलातून नाम के विचारक, सद्कर्मी व्यक्ति थे। उन्होंने सुना कुछ लोग उन्हें बुरा आदमी बताकर उनकी आलोचना करते थे। तब अफलातून ने कहा था- “मैं इस भांति जीने और कार्य करने का ध्यान रखूँगा की, उनके कहने पर कोई विश्वास ही ना करे कि मैं बुरा व्यक्ति हूँ।”

इन दिनों लगभग ऐसी ही आलोचना कुछ लोग, देश के प्रधानमंत्री जी और अपनी सरकार की कर रहें हैं। इधर प्रधानमंत्री जी के कार्य करने और उनके जीने के सत्यनिष्ठ अंदाज़ के कारण, देश के नागरिक अनर्गल आलोचनाओं को मानने के बजाय, प्रधानमंत्री जी की पहल का समर्थन कर रहें हैं।

कालाधन नियंत्रण संबंधी प्रधानमंत्री जी की कार्ययोजना की सफलता हेतु हर देशवासी ख़ुशी से परेशानियों का सामना कर रहा है। सर्वजन हिताय व राष्ट्रहित के लिए, ऐसा कर हम जाने-अनजाने अपने ऊँचे उज्जवल राष्ट्रिय चरित्र का नमूना प्रस्तुत करते नज़र आ रहें हैं।

इंग्लैंड का एक पुराना वाकया हाल ही पढ़ने में आया, उसे आज प्रसांगिक समझकर मैं दोहरा रहा हूँ। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय इंग्लैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री चर्चिल ने लोगों से अपील की है कि, वे कुछ समय के लिए अंडे खाना बंद कर दें। कारण की युद्ध में लड़ रहे सैनिकों को इनकी ज्यादा जरुरत थी। दुसरे दिन लोगों की लंबी-लंबी कतारें अंडे देने हेतु लगी दिखाई दीं। लोग अपने घरों में रखे अंडें निकालकर सैनिकों के लिए अंडे एकत्रित करने वाले केन्द्रों पर जा पहुंचे थे।

यह वाकया बन गया उच्च राष्ट्रीय चरित्र का उदहारण।

मौजूदा हालात में हमारे प्रधानमंत्री जी की अपील पर देशवासी अपने नोट बदलवाने के लिए बैंकों, डाकघरों पर कतारबद्ध खड़े हैं। यह कर्म भी हमारे राष्ट्रीय चरित्र को नई उंचाई देने वाला प्रक्रम ही है। फिर भी कुछ लोग ऐसे बेतुके प्रश्न उछाल रहें हैं कि, अन्य किसी देश में ऐसा आज तक सफलतापूर्वक नहीं हुआ। हमने ऐसा क्यों किया? हर देश की परिस्थिति, जरूरतें व उनका परिवेश भिन्न होता है। हमारी भी जरूरतें अलग हैं। ऐंसें में हमारी पहल, नयी सोच को दर्शाती है। किसी देश का पिछ लग्गू होना जरुरी तो नहीं।

अनर्गल आलोचना से पहले अपने भीतर भी झाँक लेना चाहिए। जिस पर बेईमानी का लांछन हो वह न्याय की बात कैसें करे। जिसका अपना प्रभाव ही बौना हो वह दूसरों को उंचाई कैसे दे सकता है। जो स्वयं प्रमोद, तुन्द्र में हो वह अन्यों को राह कैसे दिखा सकता है?

कहते हैं – “बुझा हुआ दिया, अन्य दीयों को नहीं जला सकता है.
जागृत ही हमें जगा सकता है।

ऊँचे कर्म व सदप्रभाव वाले हमारे प्रधानमंत्रीजी के साथ, राष्ट्र को उंचाई देने वाले उनके सद्कर्म-यज्ञ में सम्मिलित हो रहे सभी देशवासियों का धन्यवाद, आभार, उनको नमन।

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