गुलाबी गर्माहट गणतंत्र दिवस की


कड़ाके की ठंड में भी देश में गुलाबी गर्माहट घुल रही है। गर्माहट है २६ जनवरी पर गणतंत्र दिवस मनाने के उल्लास की, जोश की, उमंग की। जोशीले हमारे इस राष्ट्रीय पर्व, 68 वें गणतंत्र दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं।

सर्वज्ञात है 26 जनवरी 1950 से हमारे देश में हमारा संविधान लागू हुआ। इस दिन से देश असल में सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न गणतंत्र बना। राजेन्द्रप्रसाद ने देश के प्रथम राष्ट्रपति के पद की शपथ ली, देश के नाम प्रथम प्रेरक सन्देश दिया। केवल सन्देश ही नहीं अपितु राजेन्द्रजी, गांधीजी, सरदार पटेल जी जैसे हमारे अग्रजों का सम्पूर्ण जीवन ही हमारे लिए हमेंशा प्रेरणादायी रहा है।

राजेन्द्रप्रसाद के सन्दर्भ में यहाँ प्रस्तुत है उन्हीं के शब्दों में उनका देश-सेवा में आने का प्रेरक प्रसंग- गोपालकृष्ण गोखले जहां ठहरे थे, मैं वहां जाकर उनसे मिला । गोखले ने कुछ दिन पहले ही सर्वेंट ऑफ़ इंडिया सोसायटी का गठन किया था। मैंने यूनिवर्सिटी परीक्षा टॉप की थी और वकालात की तैयारी कर रहा था। गोखले ने कहा- हो सकता है तुम्हारी वकालात खूब चले, बहुत रुपये तुम पैदा कर सको और बहुत आराम और ऐश में दिन बिताओ। लेकिन मुल्क का भी दावा कुछ लड़कों पर होता है। तुम पढ़ने में अच्छे हो इसलिए यह दावा तुम पर अधिक मजबूत है। राजेन्द्र जी ने कुछ विचार किया और फिर अपना सम्पूर्ण जीवन देशसेवा में समर्पित कर दिया। यह है, देश सेवा हेतु सर्वस्व समर्पण का अनूठा उदाहरण।
गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर हम भी अपने दिल पर हाथ रखकर ज़रा सोचें- हम देश के प्रति कितने समर्पित हैं? क्या हम राजेन्द्र जी,गांधी जी,सरदार पटेल जी के सपनों का भारत-निर्माण कर पा रहे हैं?
इस प्रश्न का उत्तर पाने हेतु बेहतर होगा यदि हम स्वामी विवेकानंद द्वारा बताई कसौटी पर खुद को परखे। उन्होंने कहा था – यदि ज्ञानियों का ज्ञान, संघर्ष-शीलता की सोच, व्यापारी व उद्यमियों की वितरणशीलता, अंतिम वर्ग और ग्रामीणों की प्रगति को आगे ले जाया जाए तो राष्ट्र आदर्श बनता है। लेकिन इसे आदर्श बनाने में निश्चित ही देश के नेतृत्व और देशवासियों की समान रूप से भावपूर्ण और सघन कोशिश बहुत जरूरी है।
इस कसौटी पर यदि नेतृत्व को परखें तो हम अवश्य स्वीकारेंगे कि सौभाग्य से आज राष्ट्रपति जी और प्रधानमंत्री जी दोनों ही खरे नज़र आते हैं। राष्ट्रपति जी न्याय और सच के पक्षधर हैं तो मोदी जी राष्ट्रीय-प्रगति को लेकर साफ़ दृष्टि, सच और ईमानदार प्रयासों के साथ जूझ रहे हैं।
उदाहरण स्वरूप प्रधानमंत्री जी के कार्यों को, उनके भावों को केवल अंतिम वर्ग और ग्रामीणों के सन्दर्भ में ही देखें तो भी स्पष्ट हो जाएगा कि निस्संदेह वे उनकी उन्नति के लिए हरपल सजग व व्याकुल रहते हैं। इसका प्रमाण भी दृष्टव्य है कि हाल ही उन्होंने आई आई एम और आई आई टी के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया है, उक्त वर्गों की प्रगति के लिए शोध, सुझाव और सहयोग हेतु।

दरअसल देश का नेतृत्व कर रहे मोदीजी की नेक नीयत, उनका दृढ़ इरादा, और पहल करने में जुट जाने की उनकी प्रवृत्ति ही बस उनकी विश्वसनीयता के लिए सभी देशवासी काफ़ी मानते हैं। हमारे प्रधानमंत्री जी की ईमानदारी और कर्मठता पर किसी को लेश मात्र भी शक नहीं है। यही उनकी ब्रांड वैल्यू है, इसीलिए उनके साथ खड़ा देश पूर्णतः आश्वस्त है, क्योंकि उनके उचित कार्यों के फल तो समय से अवश्य ही मिलते हैं।
नेतृत्व के अलावा अब हम खुद का भी तो मूल्यांकन करें। हम यह समझें कि केवल क़ानून के बल पर कोई देश महान नहीं हो सकता है। वह महान होता है, महान नागरिकों के कारण। जापान क्यों जापान है, स्विट्ज़रलैंड क्यों स्विट्ज़रलैंड है? क्यों ये उन्नत अनुशासित होकर विश्व में सिरमौर हैं? उनके आदर्श नागरिकों के कारण ही न! उनके उच्च राष्ट्रीय चरित्र के कारण ही न! अब चिंतन करें- “हम कितने आदर्श नागरिक हैं?
तो आओ! गणतंत्र दिवस पर हमारी सिरमौर संस्कृति,पूर्वजों जैसी नेक नीयत और अधुनातन ज्ञान के सहारे देश को आदर्श बनाने हेतु आदर्श नागरिक बनने की प्रतिज्ञा करें। इसे पूरा करने की दृढ़ पहल करें और आगे बढ़ते चलें –

“रुकें न हम, थकें न हम, झुकें न हम, थमें न हम,
अटकें न हम, भटकें न हम, सुपथ चलें, बढ़े चलें।”

Comments

comments