पश्चिम बंगाल में अब हिंसा की राजनीति नहीं चलेगी!

पश्चिम बंगाल में अब हिंसा की राजनीति नहीं चलेगी!

पश्चिम बंगाल इन दिनों राजनीतिक हत्याओं का गढ़ बन गया है। देश के किसी राज्य में राजनीतिक हत्याओं पर यदि अचंभा नहीं होता, तो वो पश्चिम बंगाल ही है। यहाँ राजनीतिक झड़पों में बढ़ोतरी के पीछे ख़ास तौर पर तीन कारण माने जा रहे हैं। ये हैं बेरोज़गारी, कानून व्यवस्था का ध्वस्त होना और भाजपा की जड़ों का मजबूत होना। अब यहाँ भाजपा और उससे जुड़े संगठनों के कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। ये साफ़-साफ़ बदले की राजनीतिक कार्रवाई संकेत है। इस राज्य में बरसों से राजनीतिक कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्याएं होती रही है। जब कांग्रेस का राज था तब भी, जब वामपंथी सरकार आई तब भी और फिलहाल जब तृणमूल कांग्रेस की सरकार है तब भी यहाँ कुछ नहीं बदला। अब यहाँ भाजपा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं की हत्याएं की जा रही है। अभी तक जिस भी पार्टियों के कार्यकर्ताओं पर हमले हुए, वे खामोश क्यों रहे, उन्होंने विरोध का साहस क्यों नहीं किया? ये बहस का अलग मुद्दा हो सकता है! लेकिन, भारतीय जनता पार्टी अन्य पार्टियों की तरह कायरता नहीं दिखाएगी! हम अपने कार्यकर्ताओं पर होने वाले हर हमले का आगे बढ़कर विरोध करेंगे। हमारे कार्यकर्ताओं पर अब यदि हमले होते हैं या उनकी हत्या जैसी नृशंसता होती है, तो हम सड़क पर उतरेंगे! इसका नजारा हमने दिखा भी दिया। फिलहाल पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और उत्पीड़न चरम पर हैऔर हम पूरी ताकत से इसका विरोध करेंगे।
यहाँ का राजनीतिक इतिहास बताता है कि वामपंथियों के राज में हुई हिंसा से घबराकर ही यहाँ की जनता ने तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी को सत्ता की चाभी सौंपी थी। लेकिन, इसके बाद भी राज्य में कानून व्यवस्था नहीं सुधरी! क्योंकि, सारे हुड़दंगी वामपंथी कार्यकर्ता तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए! आश्चर्य नहीं कि वे उसी तरीके से काम करेंगे, जो वे करते रहे हैं। मतलब यह कि राज्य में बेलगाम राजनीतिक हिंसा का दौर अभी थमा नहीं है! राजनीतिक हत्याएं मुख्य रूप से लोकतंत्र और कानून के खिलाफ सत्ता की मनमानी का हथियार है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार को बड़े और कड़े कदम उठाना थे, पर ऐसा नहीं किया जा रहा। दरअसल, राजनीतिक हिंसा जैसी समस्याओं का समाधान राज्य के शासन ढांचे में संपूर्ण बदलाव से ही संभव है। स्पष्टतः ये पश्चिम बंगाल संवैधानिक मशीनरी के असफल होने का संकेत है। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा की घटनाओं से राज्य के हालातों को समझा गया था। अभी भी ये सिलसिला थमा नहीं है। अब तो ये राजनीतिक हिंसा स्कूलों तक पहुँच गई। देश में ऐसा कभी हुआ नहीं था, पर इस राज्य में हो रहा है। लेकिन, ये हिंसात्मक राजनीति अब सहन नहीं होगी। यहाँ के युवा जाग गए हैं, वे अच्छी तरह समझ गए कि अब इस सरकार को उखाड़ फैंकने का वक़्त आ गया है! … और इंतजार नहीं!

इस राज्य में जल्दी ही

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