पश्चिम बंगाल में संविधान को चुनौती

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पश्चिम बंगाल – संविधान को चुनौती

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के साथ उनके मंत्री और पार्टी नेता लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोटते हुए संघीय व्यवस्था पर कुठाराघात करने में लगे हुए हैं। एक समुदाय को खुश करने के लिए हिन्दुओं पर अत्याचार किए जा रहे हैं। ममता शायद यह दिखाने की कोशिश कर रही हैं कि एक समुदाय के लिए वह संविधान और लोकतंत्र से भी टकराने का दम रखती हैं। बात-बात पर संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देने वाली सीधी-सादी होने का दिखावा करने वाली मां,माटी और मानुष की बातें कर सत्ता हासिल करने वाली ममता आज मैं, माफिया और मुसलमान के नारे के साथ खड़ी है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते जनाधार से बौखला कर ममता, उनके मंत्री, पार्टी के नेता, तृणमूल के गुंडे सब मिलकर जनता और विरोधी राजनीतिक दलों पर हमला कर रहे हैं। पुलिस तमाशबीन नहीं बल्कि अब तो जो थाने में शिकायत करने जाता है, उसी को आरोपी बना दिया जाता है। पश्चिम बंगाल में पुलिस व्यवस्था आईपीएस अधिकारियों के हाथ में नहीं बल्कि तृणमूल के दबंगों के हाथों में हैं। तृणमूल के दबंग ही नवान्न में काबिज हैं, पुलिस मुख्यालय में दादागीरी कर रहे हैं और थानों में बैठकर जुल्म ढहा रहे हैं तथा रंगदारी वसूलने में लगे हुए हैं।

पश्चिम बंगाल के लाइब्रेरी व जन शिक्षा मंत्री और जमायत उलेमा हिन्द के अध्यक्ष सिद्दीकुल्ला चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक को लेकर दिए गए फैसले को ही चुनौती दे दी। यह पहला मौका नहीं है जब ममता सरकार या तृणमूल के नेता अदालती आदेशों को ही खुलेआम चुनौती दे रहे हैं, इससे पहले भी इस तरह की चुनौतिया अदालतों को देते रहे हैं। ममता बनर्जी ने तो केंद्र सरकार के स्वतंत्रता दिवस पर सरकारी स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश मानने से इंकार कर दिया था। यह कार्यक्रम नई पीढ़ी में जोश जगाने के लिए पूरे देश में मनाया गया। 9 अगस्त को देशभर में ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई। संसद में विशेष सत्र का आयोजन हुआ। पूरे देश में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई पर ममता बनर्जी ने राज्य के 23 जिलों के जिला अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम में शरीक होने से रोक दिया। ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री ने देश के 700 जिलों के जिलाधिकारियों से बातचीत की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री ने जिलाधिकारियों के साथ ‘विजन2022’ पर चर्चा की। उन्होंने ‘मंथन’ के दौरान नया भारत गढ़ने में जिलाधिकारियों की भूमिका पर चर्चा की। पश्चिम बंगाल के अधिकारी भी जानते हैं कि देश का राजकाज चलाने में प्रधानमंत्री कार्यालय की बड़ी भूमिका होती है, ममता के होने वाले जुल्मों के कारण राज्य के आईएएस अफसर भी मजबूर नजर आ रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी ने तो संविधान और संघीय व्यवस्था को धता बताते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार को इस्लाम के आंतरिक मामलों में दखल देने का हक नहीं है। जिस सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक की प्रथा को गैर इस्लामी और असंवैधानिक करार दिया है, हमारे देश की उसी सर्वोच्च अदालत को उन्होंने असंवैधानिक बता दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से इंकार करते हुए चौधरी ने माननीय न्यायाधीशों को एक तरह से कानून और इस्लाम की जानकारी न होने का तमगा भी दे दिया। इस तरह सिद्दीकुल्ला ने न केवल सुप्रीम कोर्ट का अपमान किया बल्कि संवैधानिक व्यवस्था को ही चुनौती दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐसे बयानों पर चुप्पी साध रखी है। इसकी एक बड़ी वजह है कि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों को खुश करने के लिए अपराध करने की छूट दे रखी है। सत्ता बनाये रखने के लालच में मुसलमानों को छूट देने के साथ ही हिन्दुओं पर अत्याचार किए जा रहे हैं। उनके त्योहार मनाने पर भी रोक लगाई जाती है। भाजपा पर साम्प्रदायिक होने का आरोप लगाने वाली ममता ने एक बार फिर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगा दी है। पिछले साल भी ममता बनर्जी ने विजयदशमी के मौके पर मूर्ति विसर्जन करने पर रोक लगाने का आदेश दिया था। 2016 में दशहरा 11 अक्टूबर को था, जबकि उसके अगले दिन यानी 12 अक्टूबर को मुहर्रम था। इस बार 1 अक्टूबर को मुहर्रम है। ममता बनर्जी दुर्गा पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन को लेकर 30 सितंबर की शाम 6 बजे से लेकर 1अक्टूबर तक रोक का आदेश दिया है। ममता बनर्जी ने कहा है कि मुहर्रम के जुलूसों के चलते दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन पर यह रोक रहेगी। श्रद्धालु विजयदशमी को शाम 6 बजे तक ही दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन कर सकेंगे। ममता बनर्जी ने यह आदेश पिछली बार कोलकाता हाई कोर्ट से फटकार लगने के बावजूद दिए हैं। ममता बनर्जी सरकार के फैसले के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट ने साफतौर पर कहा था कि यह फैसला एक समुदाय को रिझाने जैसा है। अदालत ने 1982 और 1983 का भी उदाहरण देते हुए कहा था कि उस समय दशहरे के अगले दिन ही मुहर्रम मनाया गया था, लेकिन मूर्तियों के विसर्जन पर रोक नहीं लगी थी।

भाजपा को अपने लिए चुनौती मानते हुए ममता बनर्जी के इशारे पर तृणमूल के गुंडे पूरे राज्य में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कातिलाना हमले कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस के लोगों ने हाल ही में सिलीगुडी की पार्षद और दलित नेता मालती राय पर कातिलाना हमला किया। उन्हें बाल खींचते हुए घर से बाहर निकाला गया और तलवार से गला काटने की कोशिश की गई। कातिलाना हमले के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने थाने पर प्रदर्शन किया। एक दिन पहले जलपाईगुड़ी सदर ब्लाक के बहादुर, गड़ालबाड़ी, पहाड़पुर, नंदनपुर बोआलमारी समेत आसपास के इलाकों में भाजपा कर्मियों पर हमले किए गए। पुलिस के रवैये के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह प्रदर्शन किए। इस साल लालबाजार में भाजपा के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस और तृणमूल के गुंडों ने बमों से हमला किया, फायरिंग की, लाठियां भांजी, महिलाओं को पीटा। हमारे कार्यकर्ताओं को ही जेल में बंद कर दिया गया। हमारे 200 से ज्यादा कार्यकर्ता घायल हुए। अप्रैल में दिनाजपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों पर और दुकानों पर हमले किए गए। पीड़ित कार्यकर्ताओं को देखने के लिए जब पार्टी का प्रतिनिधिमंडल वहां गया तो उन पर पुलिस की मौजूदगी में हमला किया गया। वाहन फूंक दिए गए। घरों को आग लगा दी गई। दुकानों को लूट लिया गया। पुलिस महज तमाशा देखती रही है। राज्य में कई जगह पर भाजपा के कार्यकर्ताओं को पुलिस के पक्षपात रवैये के खिलाफ प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं। भाजपा नेताओं पर कातिलाना हमले ही नहीं किए जा रहे हैं बल्कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर जेलों में बन्द किया जा रहा है। ममता बनर्जी को यह याद रखना चाहिए कि अन्याय, लूटमार और अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले पश्चिम बंगाल के लोगों ने लंबे समय राज करने वाली कांग्रेस तथा वामदलों को उखाड़ फेंका था तो आप तो बिना किसी विचारधारा के सत्ता में आई हो, ज्यादा दिन नहीं टिक पाओगी।

कैलाश विजयवर्गीय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं। सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक विषयों पर टिप्पणी के लिए जाने जाते हैं।


West Bengal – Challenges to the Constitution

The Chief Minister of West Bengal and Trinamool Congress chief Mamata Banerjee, her ministers and party leaders are engaged in oppressing the federal system by suppressing the democratic rights of people. Atrocities against Hindus are being done just to please a specific community. Mamata is probably trying to project that she can even fight with the whole democratic system and constitution for that particular community. A lady who always portrayed herself as a keeper of constitution and democracy is today going with the slogans like “I am standing with Mafias and Muslims”. Her all the big talks about welfare of society seems to be a huge lie just to grab the power and position. Her personification as a simple lady acting for welfare of society is nowhere demonstrated by her actions. Bothered with the rising BJP people in West Bengal, Mamata, her minister, the party’s leader, and the Trinamool goons are even collectively attacking the innocent public and the opposition political parties.

The police is also watching all this misconduct silently without taking any action, instead they are accusing the person coming with the complain just to save their duty. In West Bengal, the police system is not in the hands of the IPS officers but in the hands of the Trinamool goons. Navann is totally under the control of Trinamool’s domination, the police person are simply doing dadagiri sitting in the headquarters of the police station and are also engaged in collecting money from innocent people by oppressing them.

West Bengal Library & Public Education Minister and Chairman of Jamiat Ulema-e- Hind, Siddiqullah Choudhary challenged the Supreme Court’s judgment on ‘Teen Talaq’. This is not the first time when the leaders of Mamta Govt. Or Trinamool are openly challenging court orders, even before this they have been giving such challenges to the courts. Infact, previously Mamta Banerjee even refused to follow the instructions of the Central Government of organizing Independence Day programs in government schools. This program was celebrated throughout the country to awaken enthusiasm in the new generation. On 9th August, 75th anniversary of ‘Quit India’ movement was celebrated across the country. Special session was held in Parliament. Whole country paid homage to the martyrs but Mamata Banerjee prevented district officials from 23 districts of the state from participating in the program of Prime Minister Narendra Modi. On the occasion of the, 75th anniversary of the ‘Quit India’ campaign, the Prime Minister interacted with the District Magistrates of 700 districts of the country. Through the video conferencing, the Prime Minister discussed the ‘Vision 2022’ with the District Magistrates. During the ‘Manthan’, he discussed the role of the District Magistrates in formulating a ‘New India’. Officials of West Bengal also know that the Prime Minister’s Office plays a major role in running the country’s governance, but due to the challenges posed by Mamata, even the state’s IAS officers seemed to be helpless.

Siddiqullah chowdhury, while defying the constitution and the federal system, said that the Supreme Court and the Central Government have no right to interfere in the internal affairs of Islam. He has declared the supreme court of our country as unconstitutional for passing the law against ‘Teen Talaq’. Refusing to accept the Supreme Court verdict, Chaudhary tagged our Honorable Judges as ignorant about Islam & Law. In this way Siddiqullah not only insulted the Supreme Court but also challenged the constitutional system. Chief Minister Mamata Banerjee even stayed silent on such statements. One of the major reasons for this is that in West Bengal, to please Muslims, they have been exempted & rather allowed to commit crimes. Not only Muslims are being exempted for committing crimes, also, injustice against Hindus are being done just in the greed of communal powers. Hindus are restricted and banned to celebrate their festival. Mamta, who accused BJP of being communal, has once again banned Durga Mata idol immersion. Last year also, Mamata Banerjee had ordered the ban on immersion of idol on the occasion of Vijayadashmi. In 2016, Dussehra was on October 11, while on the next day i.e. 12th October was Muharram. This time Muharram is on 1 October. After Mamata Banerjee’s Durga Puja, she has ordered the ban on idol from September 6 to 6 in the evening of September 30. Mamta Banerjee has said that due to the Muharram procession, it will be stopped on the immersion of Durga statue. Devotees will only be able to immerse Durga statue till 6 pm. Mamta Banerjee has given this order despite being reprimanded by the Calcutta High Court last time. Against the Calcutta High Court decision, the Mamta Banerjee government, had clearly said that this decision is like impressing a particular community. The court also gave examples of 1982 and 1983, saying that at that time Muharram was celebrated on the very next day of Dussehra, but the immersion of idols was not stopped.

Believing the BJP as a challenge for itself, Trinamool’s goons are attacking BJP leaders and activists in the state on the behest of Mamta Banerjee. People of Trinamool Congress recently attacked the Siliguri councellor and Dalit leader Malti Rai, by pulling them out of the house with hair and later tried to cut throats with sword. BJP workers protested against these brutal attacks at the police station. A day earlier also, BJP workers were attacked in surrounding areas including Bahadur, Gadalbari, Pahanpur, Nandanpur boalmari of Jalpaiguri Sadar block. BJP workers demonstrated at many places against the attitude of the police. Another incident of this year, when the police and Trinamool goons attacked, while the peaceful demonstrations of BJP in Lalbazaar with bombs, fire, sticks and also beaten women. More than 200 karyakarta were injured. Our workers were locked up in jail. In April, in Dinajpur, BJP workers were attacked at shops. When the party’s delegation went there to see the victims, they were attacked in the presence of police. The vehicles were blown. The houses were set on fire. The shops were robbed. The police was just watching everything without taking any action. At many places in the state, BJP workers are protesting against the bias attitude of police. As BJP workers are not only being attacked but also being locked in jail in false cases.

Mamta Banerjee should remember that the people of West Bengal who fought so far with courage against injustice, robbery and all the injustice and made long ruling parties like Congress and others to leave, than she is merely ruling there without any ideology, you will not be able to stay for long with such attitude.

Kailash Vijayvargiya is the BJP’s national general secretary and is in charge of West Bengal. Well known for comment on social, economic, political topics.


পশ্চিমবঙ্গ – সংবিধানকে চ্যালেঞ্জ

পশ্চিমবঙ্গ-সংবিধানকে চ্যালেঞ্জ
কৈলাশ বিজয়বর্গী
পশ্চিমবঙ্গের মুখ্যমন্ত্রী এবং তৃণমূল কংগ্রেস প্রধান মমতা ব্যানার্জীর সঙ্গে তার মন্ত্রীরা ও পার্টির নেতারা গণতান্ত্রিক অধিকারকে হত্যা করে যুক্তরাষ্ট্রীয় ব্যাবস্থার মূলে কুঠারাঘাত করছে। একটি সম্প্রদায়কে খুশি করার জন্য হিন্দুদের ওপর অত্যাচার করা হচ্ছে। মমতা ব্যানার্জী এটা দেখানোর চেষ্টা করছেন যে একটি নির্দিষ্ট সম্প্রদায়ের জন্য তিনি দেশের সংবিধান ও গণতন্ত্রকেও আঘাত করতে পারেন। কথায় কথায় সংবিধান ও গণতন্ত্রের কথা বলা, সহজ সরল থাকার অভিনয় করা, মা মাটি মানুষের কথা বলে গদি দখল করে আজ তিনি ‘আমি, মাফিয়া আর মুসলমান’ এই স্লোগানের প্রতীক হয়ে দাঁড়িয়েছেন। পশ্চিমবঙ্গে ভারতীয় জনতা পার্টির বাড় বাড়ন্ত দেখে ভয় পেয়ে মমতা, ওনার মন্ত্রী, পার্টির নেতা, তৃণমূলের গুন্ডা সবাই মিলে জনতা ও বিরোধী রাজনৈতিক দলের উপর আক্রমণ চালাচ্ছে। পুলিশ এখন নিষ্ক্রিয়, শুধু তাই নয় এখন যারা থানায় অভিযোগ জানাতে যায় তাদেরকেই অভিযুক্ত বানিয়ে দেওয়া হয়। পশ্চিমবঙ্গের পুলিশ প্রশাসন আইপিএস অফিসারদের নয় বরং তৃণমূলের বাহুবলীদের হাতে রয়েছে।

পশ্চিমবঙ্গের লাইব্রেরী ও জনশিক্ষা মন্ত্রী এবং জামাতে উলেমা হিন্দের সভাপতি সিদ্দিকুল্লা চৌধুরী তিন তালাক নিয়ে সুপ্রিম কোর্টের রায়ের উপর চ্যালেঞ্জ দিলেন। মমতা সরকার বা তৃণমূল নেতারা যে এই প্রথম আদালতের রায়কে চ্যালেঞ্জ জানালো তাই নয় আর আগেও এই ধরণের ঘটনা হয়েছে। মমতা ব্যানার্জী স্বাধীনতা দিবস উপলক্ষ্যে সরকারি স্কুলে কেন্দ্রীয় সরকারের নির্দেশ মানতে বারণ করে দিয়েছিল, যেই কার্যক্রমটি সারা দেশ জুড়ে পালন করা হয়েছিল। ৯ ই আগস্ট সারা দেশে ‘ভারত ছাড়ো আন্দোলন’ এর ৭৫ বর্ষ পালন করা হল। সংসদে বিশেষ কার্যক্রমের আয়োজন করা হল। সারা দেশে শহীদদের শ্রদ্ধাঞ্জলি দেওয়া হয়েছিল। কিণ্তু মমতা ব্যানার্জী রাজ্যের ২৩ টি জেলার ম্যাজিস্ট্রেটদের প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদির একটি কার্যক্রমে অংশ নিতে বাধা দেন। ভারত ছাড়ো আন্দোলনের ৭৫ বছর উপলক্ষ্যে প্রধানমন্ত্রী দেশের ৭০০ টি জেলার আধিকারিকদের সাথে কথা বলেন। ভিডিও কনফারেন্সের মাধ্যমে তিনি ‘ভিশন ২০২২’ নিয়ে আলোচনা করেন। তিনি ‘মন্থন’ এর মাধ্যমে জেলা ম্যাজিস্ট্রেটদের নতুন ভারত গড়ার কথা বলেন। পশ্চিমবঙ্গের ম্যাজিস্ট্রেটরা জানেন যে প্রশাসন চালানোর জন্য প্রধানমন্ত্রীর দপ্তরের বিশেষ ভূমিকা রয়েছে। রাজ্যের আইপিএস অফিসারেরা একপ্রকার বাধ্য হয়েই মমতার এই নির্দেশ পালন করেছেন।

পশ্চিমবঙ্গের মন্ত্রী সিদ্দিকুল্লা চৌধুরী সংবিধান ও যুক্তরাষ্ট্রীয় ব্যবস্থা কে অমান্য করে বলেন যে সুপ্রিম কোর্ট আর কেন্দ্রীয় সরকারের কোনো অধিকার নেই ইসলামের অভ্যন্তরীণ ব্যাপারে হস্তক্ষেপ করার। যে সুপ্রিম কোর্ট তিন তালাক প্রথাকে অ ইসলামিক ও অসাংবিধানিক বলেছে সেই সর্বোচ আদালতকেই উনি অ সাংবিধানিক বলেছেন। সুপ্রিম কোর্টের রায়কে অগ্রাহ্য করে তিনি এক তরফে সর্বোচ্চ ন্যায়ালয়কে আইন ও ইসলাম সম্পর্কে জ্ঞান নেই এ কথা বলেছেন। এই ভাবে সিদ্দিকুল্লা শুধু সুপ্রিমকোর্টই নয় বরং সাংবিধানিক ব্যবস্থাকে চ্যালেঞ্জ করেছেন। মুখ্যমন্ত্রী মমতা ব্যানার্জী এই বিষয় চুপ করে আছেন। তার কারণ পশ্চিমবঙ্গে মুসলমানদের খুশি করার জন্য উনি তাদের অপরাধ করার অনুমতি দিয়ে রেখেছেন। গদির লোভে মুসলমানদের সন্তুষ্ট করার সাথে সাথে হিন্দুদের উপর অত্যচার করে যাচ্ছেন। হিন্দুদের ধর্মীয় অনুষ্ঠান করার উপরেও নিষেধাজ্ঞা জারি করা হয়েছে। বিজেপির উপর সাম্প্রদায়িক তকমা লাগানো মমতা ব্যানার্জী আবার দূর্গা প্রতিমা বিসর্জনের উপর নিষেধাজ্ঞা জারি করেছেন। আগের বছরেও মমতা ব্যানার্জী বিজয়া দশমীর দিনে মূর্তি বিসর্জনের উপরে নিষেধাজ্ঞা জারি করে ছিলেন ১১ই অক্টোবর ২০১৬, যেখানে ১২ ই অক্টোবর ২০১৬ তে মহরম ছিল। এবারে ১ অক্টোবর মহরম আছে এবং সেই জন্য দূর্গা প্রতিমা বিসর্জন ৩০ সেপ্টেম্বর বিকেল ৬ টা থেকে নিয়ে ১ অক্টোবর পর্যন্ত করা যাবে না বলে আদেশ দিয়েছেন। মুখ্যমন্ত্রী বলেছেন “মহরমের শোভাযাত্রা চলা কালীন দূর্গা প্রতিমা বিসর্জন করা যাবে না। “বিসর্জনকারীরা সন্ধে ৬ টা অবধি প্রতিমা নিরঞ্জন করতে পারবেন। রাজ্য সরকার এই আদেশ গত বছর কলকাতা হাইকোর্ট থেকে তিরস্কৃত হওয়া সত্ত্বেও দিয়েছেন। গত বছর মমতা ব্যানার্জী এই সিদ্ধান্তকে কলকাতা হাই কোর্ট একটি বিশেষ সম্প্রদায়ের উপর প্রতি তোষণের পরিচায়ক বলে মনে করেন। হাইকোর্ট ১৯৮২ ও ১৯৮৩ র উদাহরণ দিয়ে বলেছিলেন যে ওই দু বছর বিজয়া দশমীর পরের দিন মহরম হওয়া সত্ত্বেও প্রতিমা নিরঞ্জন আটকানো হয়নি।
মমতা বানার্জীর নির্দেশে তৃণমূলী গুন্ডারা পুরো রাজ্য জুড়ে বিজেপি নেতা ও কার্যকর্তাদের উপর বীভৎস হামলা চালাচ্ছে। বিজেপি এই হামলাকে একটি চ্যালেঞ্জ বলে মানে। তৃণমূল কংগ্রেসের লোকজন গত কাল শিলিগুড়ির বিজেপি কাউন্সিলার ও তপসিলি সম্প্রদায়ভুক্ত নেত্রী শ্রীমতি মালতী রায়ের উপরে মারাত্মক হামলা চালায়। ওনাকে চুলের মুঠি ধরে টেনে বাড়ির বাইরে বের করে তলোয়ার দিয়ে গলায় কোপ বসানোর চেষ্টা করে দুষ্কৃতীরা। এই রকম প্রাণঘাতী হামলার বিরোধ করে বিজেপি কার্যকার্তারা থানাতে বিক্ষোভ প্রদর্শন করেন। ১ দিন আগে জলপাইগুড়ি সদর ব্লকে বাহাদুর, গোয়ালবাড়ি, পাহাড়পুর, নন্দনপুর, বোয়ালমারী সমেত আসেপাশের এলাকাতে বিজেপি কর্মীদের উপর হামলা করা হয়। পুলিশের ভূমিকা নিয়ে বিজেপি কর্মীরা বিভিন্ন জায়গায় বিক্ষোভ পদর্শন করে। এই বছর লালবাজারে শান্তিপূর্ণ অভিযানে পুলিশ আর তৃণমূলের গুণ্ডাবাহিনী বোমা ছুড়ে হামলা করে, গুলি চালায়, লাঠিপেটা করে, মহিলাদের মারে। আমার কার্য্যকর্তাদের জেলে বন্দি করে দেওয়া হয়। ২০০র বেশি বিজেপি কর্মী আহত হয়। এপ্রিলে দিনাজপুরে বিজেপি কার্যকর্তার বাড়ি আর দোকানে হামলা হয়। পীড়িত কার্য্যকর্তাদের দেখতে গেলে পার্টির প্রতিনিধি মন্ডলের উপরে পুলিশের উপস্থিতিতে হামলা হয়, গাড়ি জ্বালিয়ে দেওয়া হয়, বাড়িতে আগুন লাগানো হয়, দোকান লুঠ করা হয়। পুলিশ দর্শকের ভূমিকা পালন করে। রাজ্যের বহু জায়গায় বিজেপি কার্য্যকর্তারা পুলিশের উপর পক্ষপাতিত্বের অভিযোগে বিক্ষোভ দেখায়। বিজেপি কার্য্যকর্তাদের উপর শুধু প্রাণঘাতী হামলায় হচ্ছে না, তাদের মিথ্যা মামলায় ফাঁসিয়ে জেলবন্দি করা হচ্ছে। মুখ্যমন্ত্রী মমতা ব্যানার্জীর মনে রাখা উচিত যে, অন্যায়, লুঠ আর অত্যাচারের প্রতিবাদে পশ্চিমবাংলার মানুষ বহুসময় ধরে ক্ষমতায় থাকা কংগ্রেস ও বাম দলকেও ছুড়ে ফেলে দিয়েছে। আর আপনি সেই বিচারধারা নিয়েই ক্ষমতায় এসেছেন, বেশিদিন টিকতে পারবেন না।

কৈলাশ বিজয়বর্গীয় , রাষ্ট্রীয় সাধারণ সম্পাদক এবং পশ্চিমবাংলার পর্যবেক্ষক
সামাজিক – আর্থিক – রাজনৈতিক সুবক্তা হিসাবে বিখ্যাত

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