बंगाल में चल रही नफ़रत की राजनीति

पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार, एक धर्म विशेष को खुश करने के उद्देश्य से प्रदेश में तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है, जिसके भविष्य में परिणाम बहुत ही घातक साबित होंगे।

* पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों से हिन्दुओं को भगाया जा रहा है, और प्रवासियों को संरक्षित किया जा रहा है। अगर इसके विरुद्ध अभी जागरूकता से कार्य नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब यह प्रदेश भी कश्मीर ही तरह हिन्दू विहीन कर दिया जाएगा।

* बंगाल की संस्कृति खतरे में है, लोगों को अपने धर्म का अनुसरण नहीं करने दिया जा रहा…और यह सब देख कर भी प्रदेश प्रशासन चुप है। तो इसका क्या अर्थ निकाला जाए? सरकार में बैठे लोग ऐसे उपद्रवियों को संरक्षण दे रहे हैं।

* वोट की राजनीति करने में ममता जी इतनी गिर चुकी हैं, कि वे माँ और मनुष्य की बजाये, Money और मुसलमान की ही चिंता कर रही है।

* देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की ओर जब मोदी जी ने नोटबंदी जैसा बड़ा कदम उठाया, तो सबसे ज्यादा पेट दर्द केवल ममता दीदी को ही हुआ। क्यों? क्योंकि देश में सबसे अधिक हवाला का पैसा और नकली नोट बंगाल के रास्ते ही भारत में आते है, जो की TMC की कमाई का बड़ा ज़रिया है।

* मोदी जी के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ने के लिए ममता जी ने दुश्मनों को भी दोस्त बना लिया, रैलियां निकली, फ़तवे जारी करवाऐ…लेकिन मोदी जी का बाल भी बांका न कर सकी। बल्कि मोदी सरकार में जनता की विश्वसनीयता और बढ़ी, और लोगों ने खुले दिल से मोदी जी का धन्यवाद किया।

* बंगाल में ज़रूरत है, लोकतंत्र को बचने की…बंगाल की संस्कृति और संस्कार को बचने की, और यह बीड़ा उठाया है भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने। क्योंकि बंगाल पुलिस तो स्वयं की रक्षा करने में असफल हैं, तो जनता की रक्षा कैसे करेगी। हमारे रहते अब यह अन्याय नहीं होगा, हिन्दू मुसलमान की राजनीति नहीं सहन की जाएगी। बंगाल के संस्कार और संस्कृति की रक्षा के लिए हम अपने प्राणों की आहुति भी देने को तैयार हैं।

“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है”

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