बाबासाहेब आम्बेडकर जी


यह सच ही होगा, यदि कहा जाए कि देश में सरदार पटेल राजनीतिक एकता लाए तो डॉ. आम्बेडकर जी ने सामाजिक एकता और न्याय के लिए सार्थक काम किया। भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पी रहे कर्मठ विश्व मानव डॉ. बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर की जयंती पर उन्हें शत शत नमन। सभी देशवासियों को शुभकामनाएँ।

डॉ. आम्बेडकर के बहुआयामी सोच को अब तक विस्तृत स्वरूप में नहीं अपितु संकुचित रूप में ही देखा गया है। पर अब यह अति शुभ है कि उनके बहुआयामी विचारों का वर्तमान भाजपा सरकार और मा. प्रधानमंत्री मोदी जी विस्तृत स्वरूप में आंकलन करते हैं और उनको साकार रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। मोदी जी की पारखी निगाह प्रमुखतः महिला सशक्तिकरण, देश का संघीय ढांचा, वित्त, शिक्षा, सामाजिक न्याय, यहाँ तक कि जलमार्ग आदि अनेक क्षेत्रों संबंधी बाबासाहेब के दृष्टिकोण पर है। आम्बेडकर जी के सपनों को साकार करने की मंशा से मोदी जी अनेक योजनाएँ उनके नाम के साथ लाये हैं और नई अनेक ला रहे हैं. दृष्टव्य कुछ प्रमुख योजनाएँ हैं:-

   1. उनके 125 वें जन्मदिन पर दस रुपये का सिक्का और स्टाम्प जारी किया गया ।

   2. ई पेमेंट के लिए बाबासाहेब के नाम से भीम एप जारी किया ।

   3. आम्बेडकर के सामाजिक न्याय और समानता के दृष्टिकोण के साम्य में ग्राम उदय से भारत उदय का ग्यारह दिवसीय गहन ग्रामीण कार्यक्रम शुरू किया गया जिसके अनुसार ग्रामों का विकास सुनिश्चित करना है।

   4.मा.मोदीजी ने आम्बेडकर जी से जुड़े पांच स्थानों को सामाजिक, आर्थिक तीर्थ के रूप में विकसित करने की आम्बेडकर पंचतीर्थ योजना शुरू की। वे पांच स्थान हैं :-जन्मस्थान महू, दिल्ली का अलीपुर हाउस, लन्दन का 10 किंग हेनरी रोड हाउस जहां रहकर उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की, मुंबई का इंदु मिल जहां उन्हें दफनाया गया और नागपूर की दीक्षाभूमि जहां वे बौद्ध हुए।ये सभी स्थान आधुनिक स्मारक बनाये जाएँगे।

   5.आम्बेडकर जयंती को समरसता दिवस नाम देते हुए मा. मोदीजी ने उनसे जुड़े नागपुर, वड़ोदरा और महू को विकसित करने की योजना पर भी काम शुरू करवाया है।

…..और अब मा. मोदी जी के विचार डॉ.आम्बेडकर जी के बारे में:-“डॉ.आम्बेडकर जी भारत के लिए वही हैं जो विश्व के लिए मार्टिन लूथर किंग जुनियर हैं।”

यदि बाबासाहेब ने संपूर्ण निम्न पीड़ित वर्ग के लिए काम किया तो उन्हें केवल दलित वर्ग से ही जोड़ना उनका अपमान है। वे तो विश्व मानव थे।”

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