मन की बात – २७ नवम्बर

लेसकैश की आदत डालें तो कैशलेस सोसायटी अपने आप बनेगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी नोटबंदी के बाद आज पहली बार ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश को संबोधित किया। कार्यक्रम में मोदी ने कहा कि इस बार मैंने दिवाली पर चीन की सीमा पर तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाई। 500 और एक हजार के नोट के बंद करने के अपने फैसले का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पूरा विश्व हमें इस उम्मीद से देख रहा है कि क्या हम इसमें सफल होंगे। लेकिन हम सवा सौ करोड़ देशवासी इसे सफल करके ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि लेस कैश की आदत डालिए तो कैशलेस सोसायटी अपने आप बनेगी।

जवानों के साथ मनाई दिवाली

मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने सबसे पहले सीमा पर तैनात जवानों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मैंने इस पर सीमा पर तैनात जवानों से साथ दिवाली मनाई। उन्होंने कहा कि देश ने जिस अनूठे अंदाज़ में दिवाली पर सेना के जवानों को, सुरक्षा बलों को समर्पित की, इसका असर वहां हर जवानों के चेहरे पर अभिव्यक्त होता था।

सेना के एक जवान ने मुझे लिखा कि हम सैनिकों के लिये होली, दिवाली हर त्योहार सरहद पर ही होता है, हर वक्त देश की हिफाजत में डूबे रहते हैं लेकिन घर की याद आ ही जाती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। ऐसा प्रतीत हुआ इस बार हम भी सवा सौ करोड़ देश वासियों के साथ त्योहार मना रहे हैं। पीएम ने लोगों से अपील की हम समाज के रूप में एक राष्ट्र के रुप में एक माहौल बनाएं और सेना का जवानों का हौंसला बढ़ाएं.

कश्मीर में स्कूलों को जलाने की बात का जिक्र

कुछ समय पहले मुझे जम्मू-कश्मीर से, वहां के गांव के सारे प्रधान मिलने आये थे, काफी देर तक उनसे मुझे बातें करने का अवसर मिला | वे अपने गांव के विकास की कुछ बातें लेकर के आए थे। मैंने उनसे आग्रह किया था कि आप जाकर के इन बच्चों के भविष्य पर अपना ध्यान केंद्रित करें। जम्मू-कश्मीर के हमारे बच्चे उज्ज्वल भविष्य के लिये, शिक्षा के माध्यम से विकास की नई ऊंचाइयों को पाने के लिये कृतसंकल्प हैं।

पांच सौ और हजार के नोट के बैन पर की बात

इस बार जब मैंने ‘मन की बात’ के लिये लोगों के सुझाव मांगे, तो मैं कह सकता हूं कि एकतरफा ही सबके सुझाव आए, सब कहते थे कि 500 और 1000 रुपये वाले नोटों पर और विस्तार से बातें करें। मैंने सबसे कहा था कि निर्णय सामान्य नहीं है, कठिनाइयों से भरा है। निर्णय लेने से ज्यादा कठीन है इसे लागू करना। इससे निकलने में 50 दिन लग ही जाएंगे। तब जाकर हम इससे निकल पाएंगे। 70 साल से हम जिस बीमारी को झेल रहे थे, इसके बाद हम इससे निकल जाएंगे।

आपकी पेरशानियों को मैं समझता हूं। भ्रमित करने के प्रयास चल रहे हैं फिर भी देशहित की इस बात को आपने स्वीकार किया है। कभी-कभी मन को विचलित करने वाली घटनायें सामने आते हुए भी, आपने सच्चाई के इस मार्ग को भली-भांति समझा है।

पूरा विश्व उम्मीद से देख रहा है

500 और 1000 के नोट के चलन से बाहर होने के फैसले को पूरा विश्व इसे देख रहा है। सभी लोग सोच रहे हैं क्या इसमें सफल होंगे क्या। लेकिन सवा सौ करोड़ देशवासी इसे सफल करके ही रहेंगे। इसका कारण आप हैं। इस सफलता का मार्ग ही आप हैं।

सभी बैंककर्मियों को सराहा

केंद्र सरकार, राज्य सरकार एक लाख तीस हजार बैंक, उनके कर्मचारी, पोस्ट ऑफिस सभी इसमें जुटे हुए हैं। सभी लोग इसे देशहीत में मानकर काम शुरू करते हैं। सुबह से शाम तक इसमें जुटे रहते हैं। इससे ये साबित होता है कि ये सफल होगा।

खंडवा में एक बुजुर्ग इंसान का एक्सीडेंट हो गया। बैंककर्मी को जब ये मालूम चला तो उनके जाकर मदद पहुंचाई। ऐसे कई कहानियां हैं जो मीडिया और अखबारों में आती रहती हैं।

जनधन योजना के दौरान सभी बैंककर्मी ने जो एक जुटता दिखाई थी वहीं एक बार फिर वे इसे सच कर दिखाएंगे। कई लोगों को लगता है कि इसके बावजूद वे अपने कालेधन को ठीकाने लगा लेंगे। इसके लिए भी उनलोगों ने गरीबों का इस्तेमाल कर रहे हैं। मैं ऐसे लोगों से कहना चाहता हूं कि आप गरीबों की जिंदगी के साथ न खेलें। आप ऐसा न करें कि गरीब का नाम आए जाए और जब जांच हो तो आपक नाम आए।

मध्य प्रदेश के आशीष ने कालेधन के खिलाफ चलाए गए इस अभियान को लेकर मुझे फोन किया और बताया कि आपका ये कदम स्वागतयोग्य है।

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