यू पी चुनाव


ओंधे मुंह गिरी, उत्तर प्रदेश में अपनी जमीं तलाश रही है, कांग्रेस पार्टी…

इससे गाँठ बाँधकर गदगद हो रहा है यू पी का सत्ताधारी दल सपा।

इस दल की पूंछ पकड़कर चुनावी वैतरणी पार करने का भ्रम पाल रही है कांग्रेस।

जनता को भरमाने की ये लाख कोशिश करें, पर असलियत तो यह है कि इन दोनों का ही जन-असंतोष के तूफ़ान में डूब जाना सौ टका तय है. इनकी कारगुजारियों को जनता भुलाने वाली नहीं है।

यूपी के भ्रष्ट, गुंडाराज और भाजपा की ईमानदार रीति नीति में फ़र्क सभी जानते हैं। हम भी इन दलों के कार्यों का तुलनात्मक जायजा ले लें। पहले सपा के भ्रष्टाचार दुराचरण आदि के कुछ वाक्यों पर एक नज़र :-

सत्ता- मद में मस्त सपा ने खनन माफ़िया, भूमाफ़िया, धोखाधड़ी माफ़िया को निरंकुशता करने की न केवल पूरी छूट दे रखी है अपितु इन्हें एवं भ्रष्ट अधिकारियों को भरपूर संरक्षण भी दिया है।

ये रहे आपको झंझोड़ देने वाले इनके भ्रष्टाचार, दुराचरण के प्रमाण :

आई ए एस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को रेत माफिया को पकडने पर सस्पेंड कर दिया गया था।

राजधानी में आई जी रैंक के अधिकारी को सपा अध्यक्ष ने धमकाया और सस्पेंड करा दिया। कारण इतना ही था कि अधिकारी की पत्नी ने खनन मंत्री के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई थी जो अध्यक्ष जी के क़रीबी थे।

अन्य उदाहरण नोयडा के भ्रष्ट इंजिनियर इन चीफ का मामला है। इन्हें बचाने की हर बेशर्म कोशिश के बाद भी सपा सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच करवानी पड़ी।

यूपी में सडक निर्माण सम्बन्धी कटु सत्य अवश्य ही आमजन की आँखें खोलने वाला साबित होगा। यह कि यूपी में बन रही सड़कें नेशनल हाईवे की अपेक्षा कम गुणवत्ता वाली होती हैं।

पर जरा गौर करें, इनकी एक किलोमीटर की निर्माण लागत यूपी सरकार 31 करोड़ वसूल रही है। जब कि केंद्र सरकार उच्च गुणवत्ता वाली नेशनल हाईवे का निर्माण मात्र 19 करोड़ रु एक किलोमीटर में कर रही है. हिसाब लगाएं, बेख़ौफ़ यूपी सरकार अरबों रु का भ्रष्टाचार कर इसका भार लोगों पर डाल रही है।

भाई भतीजावाद का वीभत्स उदाहरण यूपीपीएससी चेयरमैन का भ्रष्ट आचरण रहा है, जिसने सैकड़ों छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया। लचर कानून व्यवस्था के कारण ही यह संभव हुआ था कि शाहजहांपुर के जर्नलिस्ट को एक मंत्री के इशारे पर जला कर मारा गया।

रेप केस के अनेक आरोपितों व् अन्य अपराधियों के लगातार बच निकलने से सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर आमजन में संदेह और असंतोष पैदा हुआ है। सरकार कुछ भी कहे, वह इस अवधारणा व् सच्चाई को नहीं बदल सकती कि जब जब सपा सत्ता में होती है राज्य के क्राइम ज़ोन का ग्राफ उछल पड़ता है।

सभी जानते हैं कि सत्ताधारी दल सपा के एम एल ए अपने अपने क्षेत्र में निरंकुश हो जाते हैं। अधिकारी उनकी कठपुतली भर रह जाते हैं। हम समझ सकते हैं कि ऐसी स्थिति, आम नागरिकों के लिए कितनी कष्टकारी एवं असहनीय हो जाती है। अनेक अवसरों पर सपा के अध्यक्ष जी ने खुद अपने लोगों को चेताया था कि गुंडागर्दी छोड़े या नष्ट होने को तैयार रहें। समझें, ऐसी तैयारी का समय उनके लिए आ ही खड़ा हुआ है..

किसानों का हितचिंतक होने का दंभ भरने वाले मुख्यमंत्री जी उस वक्त विदेश यात्रा पर निकल गए थे जब बुंदेलखंड सतत तीन वर्षों से सूखे से जूझ रहा था।

यूपी में किसानों की दुर्दशा का आलम यह है कि कृषि विकास दर ऋणात्मक हो गई है जबकि देश में 4.1 प्रतिशत का अनुमान है, यूपी में किसानों की आत्महत्या दर भी 45 प्रतिशत बढ़ गई है।

प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं और मुख्यमंत्री जी बहाने बना रहे हैं कि बीजेपी सरकार पैसा नहीं दे रही। अमित शाह जी ने स्पष्ट किया कि 14 वें फायनेंस कमीशन ने सात लाख करोड़ से ज्यादा रुपये दिए, वे कहाँ गए ?

अब भाजपा की सोच उसकी ईमानदार, कर्मठ कार्यप्रणाली को यहाँ आगे समझेंगे और तब भाजपा के पक्ष में निर्णय लेंगे. आइए, अगले खण्ड में भाजपा को समझें:-

शीर्षक :-

तो असलियत ये है, यूपी में निरंकुश सपा सरकार की .
कोई नहीं भूला है भ्रष्ट सपा की कारगुजारियां.

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