राम जन्म दिवस पर हार्दिक बधाई

मंगलकरण अमंगलहारी भगवान श्रीरामजी का विरद है, उनका स्वभाव है दीन दुखियों का कष्ट हरना, उनके दुःख दूर करना। शर्त है केवल आप मन वचन कर्म से शुद्ध, छल छिद्र रहित होवें। ऐसे कृपानिधान भगवान श्रीरामजी के प्राकट्य दिवस रामनवमीं पर सभी विश्वबंधुओं को बहुत बहुत बधाई, शुभकामनाएँ। भगवान रामजी सभी का जीवन शांति, आनंद और प्रेम रस से भरपूर सुखमय बनावें।
विश्वास रखें यदि रामजी से दिल की गहराई से सहज याचना करेंगे तो वे जरूर एवम्अस्तु(ऐसा ही होवे) ही कहेंगे। आपकी कामना अवश्य पूरी करेंगे। इस सन्दर्भ में ऋषि मनु और शतरूपा का उदाहरण दृष्टव्य है। मनु और शतरूपा ने प्रभु जैसा पुत्र प्राप्त करने की कामना से तप किया। भगवान के सामने ह्रदय की सच्ची कामना यथा रूप में बिना कोई मुखौटे के, बिना दिखावे के रख दी। उन्होंने कहा….

“दानी शिरोमणि कृपानिधि नाथ कहहुं सति भाउ
चाहहूँ तुम्हहि समान सुत प्रभु सन कवन दुराउ”

मनु ने कहा हे दानियों में शिरोमणि ! हे कृपानिधान! हे नाथ! मैं अपना सच्चा भाव कहता हूँ, मैं आपके समान पुत्र चाहता हूं, प्रभु आपसे भला क्या छिपाना।
ऐसी सरल ह्रदय प्रार्थना में प्रभु समान पुत्र चाहा गया। दोनों भक्तों की निर्मलता से अभिभूत प्रभु के मुंह से केवल यही निकला “एवमस्तु”। इतना ही नहीं भगवान ने कहा मेरे जैसा कोई हो ही नहीं सकता, इसलिए भगवान ने स्वयं को ही अर्पित कर दिया। समय आने पर मनु-शतरूपा ही कौशल्या-दशरथ हुए और भगवान विष्णु उनके पुत्र बन रामजी के रूप में प्रकट हुए।

भगवान् रामजी को निर्मल मन जन पसंद हैं। बिना छल कपट के सहजभाव से प्रभु राम की शरण होवें, वे आपको अपनाएंगे, प्रसन्न होंगे, आपके दुःख दर्द जरूर दूर करेंगे। आइए ! रामनवमीं के पावन अवसर पर श्रीरामजी की शरण होवें और उनकी कृपा प्राप्त करें। जय श्री राम !

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