गुजरात चुनावों में होगा कांग्रेस का पर्दाफाश

गुजरात के चुनाव जैसे जैसे नज़दीक आ रहे हैं वैसे भाजपा की जीत और सुनिश्चित नज़र आ  रही है. इसी के चलते बौखलाए हुए कांग्रेसी नेता जनता की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहे हैं. बेबुनियाद आरोपों का सहारा लेकर चरित्र हनन करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन असल बात तो ये है कि इलेक्शन दर इलेक्शन कांग्रेस की नैया डूबती जा रही है. यही बात उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों ने और साफ़ कर दी है. जो कांग्रेस अपने नेता के संसदीय क्षेत्र में मुंह की खा चुकी है, वही कांग्रेस बड़ी बेशर्मी से गुजरात राज्य जीतने के दावे कर रही है. उत्तर प्रदेश से भगाए जाने के बाद अब वो गुजरात को डूबोने चली आई है. इसी से पता चलता है कि कांग्रेस चुनावी वास्तव से किस कदर दूर है.

कांग्रेस के झूठे आरोप और निंदा के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और भाजपा की लोकप्रियता अबाधित रही है, यह तथ्य कांग्रेस पचा नही पा रही है. और इसीलिए जातिवाद, साम्प्रदायिकता और तुष्टिकरण की राजनीति का सहारा लेकर गुजरात की जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है. सर्जिकल स्ट्राइक,  नोटबंदी और जीएसटी जैसे देशहित के निर्णयों पर सवाल उठाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है.

‘विकास’ को ‘पागल’ करार देनेवाले ये नहीं समझ पा रहे हैं कि ऐसा करके वो गुजरात की जनता का अपमान कर रहे हैं. गुजरात के विकास पर सवाल उठानेवाले ये आसानी से भूल चुके हैं कि २२ साल पहले उन्होंने गुजरात की कैसी दुर्दशा कर दी थी. भाजपा की अगुवाई में उसी गुजरात ने जो विकास किया है, उसे केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सराहा गया है. उल्लेखनीय बात तो ये है कि ये विकास किसी एक क्षेत्र में नहीं बल्कि कृषि, उद्योग और सेवा इन तीनों क्षेत्रों में हुआ है. और ये विकास सिर्फ शहरी या संपन्न लोगों तक सीमित नहीं रहा है. गरीब कल्याण मेला और वनबन्धु कल्याण योजना जैसी कई योजनाओं के तहत आखरी व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुँचाने के भरसक प्रयास किए गए हैं.  यही वजह है कि सिर्फ आदिवासी ही नहीं, मुस्लिम मतदाता का भी भाजपा के प्रति रुझान साफ़ दिखाई दे रहा है.

अलग अलग सर्वेक्षणों से ये स्पष्ट रूप से  पता चलता है कि गुजरात की जनता जातिवाद के बजाय विकास को महत्व देगी. वंशवाद का सहारा लेकर नहीं बल्कि विकास के जरिये सामाजिक न्याय स्थापित करने में भरोसा दिखायेगी. गुजरात का मतदाता भलीभांति जानता है कि गुजरात और भारत के लिए अगर कोई दीर्घकालिक आशा है तो वह है भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी! उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों के परिणामों से कांग्रेस की पोल बुरी तरह खुल ही चुकी है. लेकिन गुजरात चुनावों के परिणाम उसके झूठ का पूरी तरह पर्दाफाश कर देंगे इसमें कोई दोराय नहीं है. ये परिणाम भारत को कांग्रेस मुक्त करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम रहेगा, ये निश्चित है.

Why Bans On Hindu Festivals?

यह कैसी रोक – दिवाली पर शोक

दीपावली की रात धूम-धड़ाका न हो। गलियों में उत्साह से भरे बच्चे बम-पटाखे छोड़ते हुए शोर न मचाए।
आसमान में रंग-बिरंगी आतिशबाजी का नजारा न हो। कैसा लगेगा?

ऐसा नजारा दिवाली पर शोक में डूबे परिवारों में ही होता है। भारत की सुप्रीम कोर्ट ने प्रूदषण रोकने के लिए दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर ही रोक लगा दी।

अदालतें हिन्दुओं के पर्व-त्यौहार, परंपराओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में क्यों दखल देती हैं?
होली और दिवाली हमारे दो ऐसे पर्व हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत का उल्लास बताते हैं।

होली मस्ती का त्यौहार है, तो दिवाली धूम-धड़ाके का।

दोनों ही पर्व खुशी, प्यार और एक-दूसरे का ध्यान रखने का संदेश देते हैं। होली हो घर में कपड़े पहनकर बैठे रहिए।
कोई रंग-गुलाल न लगाए तो कैसे माहौल होगा। पर्यावरण के नाम पर या पानी बचाने के नाम पर होली न खेलों।
रंग न लगाओं, गुलाल न लगाओ।
ब्रज में होली में कितना रंग-गुलाल उड़ता है, टेसू के फूलों से बने रंगों से होली न खेलें तो कैसा लगेगा।
राधा और कान्हा की होली के गीत गाएँ तो, पर रंग-गुलाल न उड़े तो होली का उल्लास पैदा होगा?

दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक से दिल्ली की प्रदूषित वायु एकदम स्वच्छ हो जाएगी।
दिल्ली वाले पटाखे इंदौर से खरीद कर ले जा सकते हैं और फोड़ भी सकते हैं। आखिरकार अदालतें हो या सरकारें, हिन्दुओं के त्यौहारों पर ही दखल क्यों देती हैं? जन्माष्टमी पर दही-हांडी का मामला हो तो भी अदालत डंडा चला देती है। गोविंदाओं की उम्र तय करती है।

तमिलनाडु के जलीकट्टू मनाने का मामला हो तो भी अदालत आड़े आ जाती है।

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगा देती है तो साथ ही विजयदशमी पर शस्त्र पूजन और बाहर लेकर चलने पर प्रतिबंध लगा देती हैं।

श्रीराम की शोभायात्रा हो भगवान के हाथ में धनुष-बाण और हनुमान के हाथ में गदा की जगह छड़ी हो तो कैसा लगेगा।

ऐसे फैसलों से भारतीय पर्वों को मनाने की परंपराओं को समाप्त करने की कोशिश हो रही है।

पिछले साल 11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित कर दी थी।
इस वर्ष 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने उक्त आदेश को अस्थायी तौर पर वापस लेते हुए पटाखों की बिक्री की कुछ शर्तों के साथ इजाजत दे दी थी।

पटाखों की बिक्री पर रोक के लिए फिर अदालत में चुनौती दी गई। वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर तक पहुंचने के आधार पर पटाखों की बिक्री रोक दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि दिवाली के बाद इस बात की भी जांच की जाएगी कि पटाखों पर रोक के बाद हवा में कुछ सुधार हुआ है या नहीं।

अदालत ने कहा है कि 1 नवंबर के बाद पटाखों की बिक्री फिर से शुरू की जा सकती है।
पटाखा विक्रेताओं को दिए नए और पुराने दोनों ही लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में पटाखों की बिक्री के लिए पुलिस की निगरानी में लाइसेंस दिए जाएं।
ज्यादा से ज्यादा 500 अस्थाई लाइसेंस ही दिए जा सकेंगे। दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में आतिशबाजी की दुकानें सज गई। दुकानदारों ने करोड़ों रुपयों का माल दुकानों में भर लिया और अदालत ने रोक लगा दी। अब दिवाली के बाद पटाखें कौन खरीदेगा। पटाखा कारोबारियों के तो बर्बाद होने की नौबत हो गई। दिवाली से पहले ही उनका दिवाला निकल गया।

अगस्त में पूरे देश में बड़े जोश-खरोश से बकर-ईद मनाई गई। हम सबने मुबारकबाद दी।

पर्यावरण का झंडा उठाने वालों ने लाखों बकरें कटने का सवाल उठाया क्या।

गायें कटने से रोके तो बहुत से लोगों को तकलीफ होती है।
खान-पान पर रोक नहीं लगाई जा सकती है तो हमारे पर्वों पर क्यों रोक लगाई जाती है।

पर्यावरण की चिंता करनी है तो पूरे साल करो।
पौधे लगाओ, पेड़ों को बचाओं, पानी की बर्बादी पूरे साल रोको।
खास दिन ही पानी की चिंता होती है क्यों बताओ?

खास दिन ही पर्यावरण की चिंता होती क्यों, खास दिन ही जलीकट्टू पर जानवरों को बचाने का ख्याल क्यों होता है।

पिछले साल राजस्थान सरकार ने ऊंटों को बचाने के लिए रोक लगाई तो कितना हल्ला मचा था।

केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय ने जानवरों की बिक्री के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए तो क्यों हल्ला मचाया गया था।
इस साल बकरीद पर उत्तर प्रदेश में ऊंटों के काटने पर रोक लगाई तो एक समुदाय ने जमकर विरोध किया। उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खाने बन्द किए गए तो कितना तमाशा किया गया।

जैन पर्व के दौरान मांस की बिक्री पर रोक लगाई जाती है तो कितना विरोध होता है।

पर्यावरण को लेकर कल यज्ञ-हवन करने पर भी रोक लगाई जा सकती है। हवन में भी लकड़ी जलती है और धुआं निकलता है। बारी तो अब हिन्दुओं के अंतिम संस्कार पर भी रोक लगाने की आ सकती है। मिट्टी का शरीर मिट्टी में ही मिलना है तो फिर कब्रिस्तान बढ़ाने की क्या जरूरत है। कब्रिस्तान की बढ़ती जरूरतों के कारण सरकारी जमीनों पर कब्जे किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में तो सरकारी जमीनों पर कब्जा कराने के लिए अखिलेश की समाजवादी सरकार ने जमकर पैसा लुटाया।

पर्यावरण के नाम पर हिन्दुओं की चिता जलाने पर भी रोक लगाई जा सकती है। पर्यावरण की चिंता सभी को करनी है। केवल एक दिन पर्यावरण बचाने के नाम पर त्यौहारों पर पाबंदी न हो।

हिन्दू तो पर्यावरण के सबसे बड़े पुजारी हैं। गाय को माता मानते हैं, नदियों की पूजा करते हैं, पेड़-पौधों की पूजा करते हैं। कुछ पेड़ों को तो काटना भी पाप माना जाता है। जानवरों की बलि का विरोध हिन्दू ही करते हैं।

ऐसे में अमावस्या की रात को पटाखों पर लगी पाबंदी ने काली रात ही बना दी है। दिवाली धूम-धड़ाके का, खुशियां बांटने का, एक-दूसरे का ध्यान रखने का और अमावस्या की रात को उजियारा बनाने का त्यौहार है।

अदालत हो या सरकारें, जनमानस की भावनाओं को ध्यान में रखने की जरूरत है।
जहां तक सरकारों का सवाल है, आतिशबाजी बनाने या बेचने का लाइसेंस देन का काम उनका का ही है।

कितने धमाके वाले, कितनी देर चलने वाले, कितनी रोशनी देने वाले पटाखे बने या बेचे जाएं, उस पर नियम बनाएं, न कि रोक लगाने की प्रवृति को बढ़ाया जाए। त्यौहार भी अपनी मर्जी का है, जिसे पटाखे चलाने हो चलाए, न चलाने हो तो घर का दरवाजा बंद करके बैठे जाएं।

बच्चों के उल्लास पर रोक न लगाएं, यही एक दिन होता गली में एक साथ मिलजुलकर धूम-धड़ाका करने का।

Politics, Kerala Communists

केरल- कम्युनिस्टों की रक्तरंजित राजनीति

हरे-भरे केरल को लाल खून से सींचने का काम कम्युनिस्ट लंबे समय से कर रहे हैं। केरल में जब-जब कम्युनिस्ट सत्ता में आते हैं, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमले तेज हो जाते हैं। सत्ता में बने रहने या अपना असर बढ़ाने के लिए कम्युनिस्ट हमेशा से विरोधियों का खून बहाने में विश्वास रखते हैं।

ईश्वर के अपने घर केरल में लाल आतंक देश की आजादी के तुरंत बाद ही शुरु हो गया था। 1948 में राष्ट्रीय स्वयंसेक संघ के द्वितीय सर संघचालक पूज्यनीय गुरुजी की एक सभा पर हमला किया गया था। केरल में संघ और भाजपा की बढ़ती ताकत से बौखलाकर कम्युनिस्टों ने पिछले कुछ समय से हमले और तेज किए हैं। केरल के मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन खुद संघ के कार्यकर्ता की हत्या के आरोपी हैं। विजयन और कोडियरी बालकृष्णन की अगुवाई में पोलित ब्यूरों के सदस्यों ने संघ के स्वयंसेवक वडिक्कल रामकृष्णन की हत्या 28 अप्रैल 1969 कर दी थी।

कन्नूर जिला केरल के मुख्यमंत्री विजयन का गृह जिला है। पिछले साल मई से अबतक हिंसा की 400 से ज्यादा वारदातें हुई हैं। केरल में वर्ष 2001 के बाद से अबतक राज्य में 120 कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्याएं की गई है। इनमें से 84 कार्यकर्ता तो केवल कन्नूर जिले में ही शहीद हुए हैं। 14 कार्यकर्ता तो केवल मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के गृहनगर में कम्युनिस्टों की हिंसा के शिकार बने। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह की केरल के कन्नूर जिले से शुरु हुई जन रक्षा यात्रा से वामदलों के नेता बौखला गए हैं। दिल्ली में भी माकपा के कार्यालय पर भाजपा के कार्यकर्ता रोजाना प्रदर्शन कर रहे हैं। केरल में भाजपा अध्यक्ष की जन रक्षा यात्रा के माध्यम से पूरे देश में कम्युनिस्टों की रक्तरंजित राजनीति का सच देश की जनता के सामने आया है।

जन रक्षा यात्रा पूरे प्रदेश का भ्रमण करने के बाद 17 अक्टूबर को तिरुवनंतपुरम में समाप्त होगी।

सच में अमित शाह जी ने यह साबित कर दिखाया, कि अपने कार्यकर्ताओं पर हमलों के खिलाफ वे हर कदम पर पूरी तरह साथ हैं। इससे पूरे देश के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है। पूरे देश में वामदलों के खिलाफ जनता में गुस्से की लहर व्याप्त हो रही है।

‘सभी को जीने का हक!! जिहादी-लाल आतंक के खिलाफ’

इस नारे को लेकर जारी इस यात्रा का मकसद पूरे देश के सामने वामदलों की रक्तरंजित राजनीति का खुलासा करना है। अमित जी ने जनरक्षा यात्रा की शुरुआत में राज्य में सत्तारूढ लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी राज्य में कम्युनिस्टों को सत्ता मिलती है, संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले बढ़ जाते हैं। भाजपा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से हत्याओं को लेकर जवाब भी मांगा है। मुख्यमंत्री के पास भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या का कोई जवाब नहीं है। हताशा में भाजपा और संघ पर अनर्गल आरोप लगाकर राजनीति करने में लगे हैं।

पश्चिम बंगाल में भी कम्युनिस्टों का लंबे समय तक आतंक रहा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी की भी कम्युनिस्टों ने राज्य की सत्ता में रहते हुए पिटाई की थी। ये सब भूलकर तृणमूल भी उसी राह पर अग्रसर है, ममता बनर्जी की शह पर उनकी पार्टी के गुंडे भाजपा व संघ के कार्यकर्ताओं को रोजाना निशाना बना रहे हैं। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर सुनियोजित और संगठित तरीके से हमले किए जा रहे हैं। उनके घरों और दुकानों को आग लगाई जा रही है। वाहनों को फूंका जा रहा है। मां-बेटियों के डराया धमकाया जा रहा है। कई स्थानों पर बदसूलुकी भी की गई है। ममता बनर्जी की पुलिस का हाल यह है कि थाने तृणमूल के गुंडे चला रहे हैं। तृणमूल के नेताओं के कहने पर मुकदमे दर्ज होते हैं। पुलिस के बड़े अफसर भी तृणमूल कांग्रेस नेताओं के पालतू कर्मचारी की तरह काम करते हैं। पुलिस के जरिये संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं को फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजा जा रहा है।

पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की व्यथा को जाना और ममता सरकार को रक्तरंजित राजनीति करने पर चेतावनी दी। अमित शाह ने केरल और पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या और जानलेवा हमले, फर्जी मुकदमों में फंसाने को लेकर आन्दोलन करने का ऐलान भी किया।

केरल में कम्युनिस्टों के बढते आतंक के कारण भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को खुद सड़क पर आना पड़ा है। वे पदयात्रा के जरिये वामदलों की रक्तरंजित राजनीति की तरफ देश की जनता का ध्यान खींचने में सफल हुए है। हैरानी की बात है, कि हमारे देश के मानवाधिकार संगठनों ने केरल और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्याओं को लेकर हाय-तौबा मचाना तो दूर, एक उफ्फ तक नहीं की।

इन तथाकथित मानवाधिकार संगठनों का काम केवल कुछ सीमित घटनाओं तक ही सीमित रहता है। ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ मानवाधिकार संगठन केवल राजनीतिक कारणों से ही हल्ला मचाते हैं। मानवाधिकार संगठन और देश के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने पिछले कुछ समय से देश में असहिष्णुता का आरोप लगाया है। ऐसे आरोप केवल राजनीतिक दलों के सहारे पलने वाले मानवाधिकार संगठन और बुद्धिजीवी ही लगा रहे हैं। इस बात की असलियत देश की जनता जान चुकी है।

मीडिया में भी, केवल एक सीमित वर्ग ने ही ऐसे प्रायोजित आरोपों को जगह दी है। मीडिया के ऐसे लोगों की असलियत भी अब जनता के सामने आ रही है। मैंने पश्चिम बंगाल में खुद यह अनुभव किया कि मीडिया घरानों पर ममता बनर्जी का कितना खौफ है। ममता के डर की वजह से पश्चिम बंगाल के अखबार और टीवी चैनल तृणमूल कांग्रेस की गुंडागर्दी, जबरन वसूली, लूटपाट और महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को प्रकाशित करने और दिखाने से डरते रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में भाजपा के ममता सरकार के खिलाफ बड़े आन्दोलनों के कारण मीडिया में अब सरकारी संरक्षण में होने वाले अत्याचारों का खुलासा होने लगा है। इसी तरह केरल में भी मीडिया पर सत्तारूढ़ वामपंथी सरकारों का दबाव रहा है। खासतौर पर वाममोर्चा सरकार ने तो अखबारों और चैनलों को बहुत अधिक डरा-धमका कर रखा हुआ है। राष्ट्रीय मीडिया में कुछ घटनाओं का जिक्र तो हुआ पर ज्यादातर घटनाओं को जगह ही नहीं दी गई। हाल ही में मीडिया के एक वर्ग पर भी केरल में हमले हुए हैं। केरल में तो पुलिस सरकार के इशारे पर मीडिया भी को निशाना बना रही है।

पश्चिम बंगाल में तो एक समुदाय को खुश करने के लिए ममता बनर्जी ने हिन्दुओं के त्यौहार और पर्व मनाने पर भी प्रतिबंध लगा दिए। यह बात बेशक मजाक में कही गई कि जिस बंगाल में पहले दुर्गा उत्सव मुख्य पर्व था, वहां अब मुहर्रम मुख्य पर्व हो गया है। किन्तु, यह एक खतरनाक संकेत है। राजनीतिक फायदे के लिए ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करने पर तुली हैं। हिन्दुओं को डराया-धमकाया जा रहा है। गांवों से सुनियोजित तरीके से उन्हे घर-बार छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है। उनके कारोबार तबाह किए जा रहे हैं। उनकी सम्पत्तियों पर तृणमूल के कार्यकर्ता पुलिस के सहयोग से कब्जे कर रहे हैं। ऐसे इलाकों में एक समुदाय को बसाया जा रहा है। ऐसी घटनाओं को मीडिया में स्थान नहीं मिला। मानवाधिकार संगठनों ने भी ऐसी घटनाओं की तरफ से मुहं मोड़ लिया।

वामदल हो या ममता बनर्जी, इन्हें अब यह ध्यान रखना चाहिए कि भारत के 80 फीसदी हिस्से पर भाजपा का असर है। केन्द्र में सरकार और 18 राज्यों में भाजपा तथा सहयोगी संगठनों की सरकारें हैं। अब बारी केरल और पश्चिम बंगाल में कमल खिलाने की है।

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रोहिंग्या मुसलमानों को शरण क्यों नहीं

पिछले महीने म्यांमार की सेना पर हमले के बाद वहां से खदेड़े गए रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में शरण देने, न देने के फैसले पर कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन मानवाधिकारों के नाम पर घडियाली आंसू बहाने में लगे हुए हैं।

म्यांमार में सेना पर रोहिंग्या रक्षा सेना के हमले के बाद वहां से अवैध रूप से भारत में आए रोहिंग्या मुसलमानों को शरण न देने के फैसले पर भारत सरकार पर सवाल उठाएं जा रहे हैं।

दरअसल जिन कारणों से म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमानों को खदेड़ा गया था, ऐसे ही कारण भारत में बनने की आशंका हैं।
सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि रोहिंग्या मुसलमानों से देश की शांति एवं सुरक्षा को खतरा है।

म्यांमार में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को वहां का नागरिक नहीं माना जाता है। उसके कई कारण हैं।
इसके बावजूद रोहिंग्या मुसलमान वहां तमाम सुविधाओं के साथ रह रहे थे। म्यांमार सरकार ने 1982 में राष्ट्रीयता कानून बनाकर ‘नागरिक दर्जे’ को खत्म कर दिया था। म्यांमार सरकार का कहना था कि रोहिंग्या मूल रूप से ‘बांग्लादेशी’ हैं।

कुछ वर्षों से इस्लाम खतरे में है का नारे देते हुए खाड़ी देशों से गए इस्लामिक गुरुओं ने म्यांमार सरकार के खिलाफ रोहिंग्या मुसलमानों को खड़ा कर दिया।

इस्लाम खतरे में हैं, उसे बचाने लिए हथियार चलाना सिखाया

आतंकी गतिविधियों का प्रशिक्षण सिखाया, सेना से लड़ने का जज्बा पैदा किया। पहली बार 2012 में रोहिंग्या मुसलमानों ने बौद्धों पर हमला किया तो उन्हें जवाब भी मिला।
पिछले महीने की 25 तारीख को रोहिंग्या रक्षा सेना के हमले में 71 लोगों की मौत हो गई है।

यह हमला रखाइन राज्य में हुआ। रखाइन को अराकान भी कहा जाता है।

रोहिंग्या मुसलमानों ने करीब 30 पुलिस चौकियों और एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया था। म्यांमार सेना की जवाबी कार्रवाई में 59 विद्रोही और 12 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं।

इसके बाद म्यांमार सेना की बड़ी कार्रवाई के बाद रोहिंग्या मुसलमानों को वहां से भागना पड़ रहा है।

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य मुस्लिम देशों ने रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने से इंकार कर दिया है।
सबसे बड़ी तो यह है कि बरसों से म्यांमार में बसे रोहिंग्या मुसलमानों को इस्लाम के नाम पर बंदूक थमाने वाले देशों ने भी शरण देने से इंकार कर दिया है।

भारत सरकार ने भी रोहिंग्या मुसलमानों के शरण देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि उनसे देश की सुरक्षा को खतरा है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी, जिन्हें राज्य में मुसलमानों का सरपरस्त माना जाता हैं, रोहिंग्या मुसलमानों को शऱण देने की परोकारी कर रही हैं।

बांग्लादेशी मुसलमानों को वोट के लालच में पश्चिम बंगाल में बसाने वाली ममता बनर्जी की सरकार ने तो आतंकवादी, घुसपैठियों के राशन कार्ड भी बनवा दिए हैं।

आतंकवादी घटनाओं में पकड़े गए रोहिंग्या मुसलमान के जन्म प्रमाणपत्र भी पश्चिम बंगाल में बन रहे हैं।
रोहिंग्या आतंकी मोहम्मद इस्माइल को हाल ही में हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
उसके पास से पश्चिम बंगाल में बना बर्थ सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ था। इस घटना ने वहां की सुरक्षा-व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है।

रोहिंग्या आतंकी मोहम्मद इस्माइल को दमदम नगरपालिका ने बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया है।

उसके पास से मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, यूएनएचआरसी कार्ड भी बरामद किया गया है।

इस बात से यह सच्चाई तो सामने आ गई है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री केवल और केवल वोटों के लालच में और एक समुदाय को खुश करने के लिए ही रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने की परोकारी कर रही हैं।

सारी दुनिया जानती है कि प्राचीन काल से ही भारत की छवि एक उदार राष्ट्र की रही है। तमाम धर्म और समुदाय भारत में विकसित हुए हैं। भारत हमेशा यहां आने वालों का स्वागत करता रहा है।

हमारा इतिहास बताता है कि विदेशी आक्रांताओं ने शरण लेने के नाम पर हमेशा छल किया।

पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी की 17 बार जान बख्शी, पर उसने क्या किया। कितने मुगलों को भारत में शऱण दी गई। पुतर्गालियों को भारत में शरण दी गई। व्यापार करने के नाम पर भारत में आने वाले अंग्रेजों ने राजा-महाराजाओं से विश्वासघात करते हुए एक-दूसरे को लड़ा कर अपना साम्राज्य कायम कर लिया।

सिकंदर के महान बनने की कहानी के पीछे भी धूर्तता की बड़ी भूमिका थी। भारत में आजादी के बाद लगातार लोग शऱण के लिए यहां आते रहे हैं। यहूदियों को लाखों हिन्दुओं और सिखों को पाकिस्तान में मुसलमानों द्वारा किए गए कत्ले आम के कारण भारत आना पड़ा।

1950 में बड़ी संख्या में तिब्बत के लोगों को भारत में चीन के कड़े विरोध के बावजूद शरण दी गई। अफगानिस्तान से बड़ी संख्या में लोग भारत के कई शहरों में रह रहे हैं। बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन को भारत में ही शरण मिली। भारत में पांच हजार से ज्यादा यहूदी रह रहे हैं।

कुछ समय पहले भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान भारत के यहूदियों ने कहा था कि हमें भारत में डर नहीं लगता है, लेकिन देश के बाहर पैदा होने वाले आतंक से खतरा बताया था।

ऑल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एइएमइएम) के औवेसी ने तो तस्लीमा को शऱण देने के बहाने रोहिंग्या मुसलमानों को शऱण देने की वकालत की है।

कुछ मामलों को छोड़ दें तो शरण देने वालों का इतिहास विश्वासघात से ही भरा हुआ है। उदारता के कारण भारतीयों को शऱण देने के कारण खामियाजा ही भुगतना पड़ा है।

दरअसल इस समय केंद्र सरकार की सबसे बड़ी चिंता रोहिंग्या मुसलानों को शरण देने के बाद उनसे होने वाली असुरक्षा से ज्यादा है। बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमानों के आतंकवादी संगठनों में शामिल होने की सूचना के बाद केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया है।

2015 में श्रीनगर के दक्षिण में 30 किलोमीटर दूर एक एनकाउंटर में मारे गए दो आतंकवादियों में से एक की पहचान रहमान-अल-अरकानी उर्फ बर्मी के तौर पर की गई थी।

अराकान ही वह इलाका हैं जहां से रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार सेना ने खदेड़े थे। म्यांमार सरकार ने 9 अक्टूबर 2016 को बांग्लादेश से लगी सीमा चौकियों पर हुए आतंकी हमलों को अंजाम देने वाले संगठन अका-मुल- मुजाहिदीन और उसके सरगना हाविसतुहार के पाकिस्तान से संबंध होने की बात कही थी।

म्यांमार सरकार ने घोषणा की थी मुंगदॉ इलाके के रहने वाले हाविसतुहार ने पाकिस्तान में 6 महीने की तालिबानी आतंकी ट्रेनिंग ली थी।

आतंकवादी अब्दुल करीम टुंडा ने भी पकड़ने के बाद पुलिस को बताया था कि लश्कर म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के जरिये आतंकवाद फैला रहा है। म्यांमार में बौद्धों पर हमला करने के लिए रोहिंग्या मुसलमानों को उकसाने में बर्मी की भूमिका रही है। बर्मी के बारे में कहा जा रहा है कि अलकायदा के लिए भी उसने लड़ाई लड़ी है। इस समय देश में अवैध रूप से रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों की संख्या 42 हजार से ज्यादा बताई गई है। सबसे ज्यादा रोहिंग्या घुसपैठी जम्मू में रह रहे हैं।

भारत में रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। रोहिंग्या मोहम्मद सलीमुल्लाह और मोहम्मद शाकिर ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर भारत में शऱण मांगी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत यह शऱण मांगी गई है।

सरकार ने कहा है कि धारा 21 के तहत मिला जीने का अधिकार धारा 19 से जुड़ा है और यह धारा केवल भारतीय नागरिकों के लिए हैं। जो लोग रोहिंग्या मुसलमानों के लिए आंसू बहा रहे हैं, उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दुओं या दूसरे धर्मों के नागरिकों पर होने वाले जुल्मों के खिलाफ कभी कुछ बोला है।

पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों की जबरन मुस्लिमों से शादी कराईं जा रही हैं, उनके मंदिरों पर हमले हो रहे हैं।

यह सब शायद मानवाधिकार की श्रेणी में नहीं आता है। मानवाधिकार की श्रेणी में आता है कि पहले अवैध रूप से किसी देश में घुसों। वहां की सेना पर हमले करो और फिर जवाबी कार्रवाई हो तो मानवाधिकार की बात करों।

भारत सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने का सही निर्णय लिया है। भारत 1951 संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी कनवेंशन का हिस्सा नहीं है। किसी को भी शरणार्थी का दर्जा प्राप्त करने के लिए एक प्रक्रिया का पालन करना होता है। रोहिंग्या मुसलमानों में से तो किसी ने प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।

Celebrate your Inner self this Dussehra

India is a land of fests, customs and religions. We, in India as spiritual and religious citizens believe in celebrating every religion in India. No matter from which religion we belong to. Like recently, we witnessed a Muslim celebrity celebrating Diwali. Festivals are part of our lives. For youngsters dwelling in hostels, festivals are the best opportunity to get back to their homes and enjoy mom’s delicious recipes. For aged people, it is the best or the only time when they get to meet their grown up responsible children who have also got children. And for children festival is about getting handful of prasad, wearing new clothes , enjoying aarti and much more.

Dussehra is one of the most auspicious and  exhilarating occasion when Indians unite to celebrate it. It isn’t just a festival. Dussehra in itself comes up with a message that we all should remember and follow throughout our lives. This exquisite festival lays down the message that ‘Good always wins over the Evil’. And so applies in our lives too. We all face obstacles. In Fact, the biggest devil that resides today is in our “ourselves”. Today we do not have Ravana physically. But the truth is that Lord Ram and Lord Ravana both are within us. Everything is within us. The good as well as bad. It depends on us what to use , how to use and why to use. The Evil that is assassinating many of us in today’s world are jealousy, hatred, comparison, fear,illogical believes. This all together makes today’s Ravana which is much devastating and destructive than the earlier one.

Dussehra rightly reminds us to kill such thoughts timely and clean our inner selves intermittently. So as to not only survive but to live better, healthier and stronger.  Dussehra is basically like celebrating life every year by implementing its core message every day and spreading it every hour at least to self and our beloveds if not feasible to spread it to many.

We face several evils in our life. Be it in the form of people who are enemies or be it in the form of situation which completely opposes us. Remember! Every evil fosters us. Cowards give up. And the brave ones continue even after facing the worst. Ravana had all the powers yet he failed. Lord Rama too had powers but he used them sagaciously.Using yourself rightly is important. Stand for what’s right even after others favoring the wrong.

Happy Dussehra ! Let’s kill the devil and celebrate the new us.

Reserve your passion for Sports

Dil Do Sports Ko!

Indian women Cricket Team reached in World Cup Final Yesterday. So, after 1983, this sunday will witness another Indian Team contesting for the World Cup at Lords. Whole nation is talking about the magnificent show put-up by Captain Mithali Raj & her team.

And this again shows our love with sports. From snatching the cricket World Cup trophy, to Sachin Tendulkar’s soul-stirrer retirement to being the undefeated Kabaddi champions to Mary Kom’s stunning upturn, and the inspiring Olympic Medals the girls brought recently… India has encountered so many important snapshots of Indian games history that you will love to backpedal in time and remember them, again and again!

Indian sports persons, keeps gifting us those moments, in different fields and games every now & then. Though the cricket is most discussed sport, it was never the only one. Hockey, Badminton, Tennis, Wrestling, Kabaddi, Athletic Games, Football, Chess & a lot more… India is progressively expanding award counts at global occasions, and has made considerable progress in every front.

The historical backdrop of games in India goes back to the Vedic time. Physical culture in antiquated India was sustained by a capable fuel- religious customs. There were some all around characterized esteems like the mantra in the Atharva-Veda, saying,” Duty is in my right hand and the fruits of triumph in my left”. The organizers of the Olympic thought had India particularly at the top of the priority list when they were settling on the different controls.

Did you realize that India has won each of the five Kabaddi world cups played till now? How astounding is that! With the current 2014 Asian Games win by both the men and ladies Kabaddi groups, India has denoted its unbeaten domain in this game. In spite of the fact that kabaddi is basically an Indian diversion, very little is thought about the cause of this amusement. There is, nonetheless, solid proof, that the diversion is 4,000 year old.

The game which is requires the duo of aptitude and power, and joins the attributes of wrestling and rugby, was initially intended to create self preservation, notwithstanding reactions to assault, and reflexes of counter assault by people, and by gatherings or groups. It is a somewhat straightforward and cheap diversion, and neither requires a gigantic playing zone, nor any costly gear. This clarifies the notoriety of the diversion in country India. Kabaddi is played all finished Asia with minor varieties.

Going back to the 1960s, the great years for the Indian Football group and it positioned among the main 20 groups of the world. Under the tutelage of the incredible Syed Abdul Rahim, they won the Asian Games. Amid the group’s pinnacle time frame, they were naturally best in class to play in the FIFA World Cup. In any case, they couldn’t take an interest in the amusements because of absence of assets, money related limitations and other inward issues. It’s time for the hidden talent to emerge like that of 1960s, and bring back Indian football into the league.

Talking about the league and not mentioning about the Flying Sikh, Milkha Singh’s commitment to Indian games would be truly an injustice! What’s more, when we discuss some of India’s most critical donning minutes, we can’t avoid Singh’s execution in the 1960 Olympics where he broke the 400m Olympic record.

Similarly, With regards to Hockey, the commitment of Major Dhyanchand can’t be skipped. “The Wizard” drove the Indian Hockey group to triumph many a times including the 1936 Berlin Olympics triumph over Germany which was seen by more than 40,000 individuals including Hitler.

Youth in the world of today must be appreciated for the Craze among Cricket but not limited to Cricket! Latest example lies when the India’s hockey heroes kept the banner flying on a dismal day for cricket in CT17. All thanks to  the 2010 Commonwealth Games, badminton got a really high-class framework, and now the the Badminton World Federation (BWF) sees a tremendous potential for showcasing the amusement in India. India’s most recent badminton heartthrob, P.V. Sindhu added another quill to India’s eminence as of late by turning into the main Indian lady to win a silver award at Rio Olympics 2016.

In a nation like India where addiction on cricket is not shrouded, we saw another games sensation in Narain Kathikeyan when this youthful racer turned into India’s first Formula One engine hustling driver. After him, Karun Chandok excessively joined the game, and on account of their underlying force, now there is an Indian F1 group and an Indian Grand Prix circuit.

These legendary illustrations represent a solid structure of Sports in india and additionally significant extent of various games in the country! All, the country demands is equivalent appreciation as that of Cricket and there would be better open doors for sportspersons who are enthusiastic about the games like Football, Kabaddi, Badminton, Hockey and so forth to come into solid spotlight of gratefulness and support.

KHELEGA INDIA to aur bhi jaldi BADHEGA INDIA!!

GST Launch By Prime Minister Narendra Modi & President Pranab Mukherjee

ऐतिहासिक! एक गजब का आर्थिक सुधार… #GST

शनिवार की  रात भारत की संसद ने एक नया इतिहास रचा।

One Nation, One Tax प्रणाली हेतु देश में 1 जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू हो गया। आधी रात को संसद के विशेष सत्र में GST लागू करने की घोषणा के साथ ही देश में नई आर्थिक आजादी के अध्याय का प्रारम्भ हुआ।

यह चौथा ऐसा अवसर रहा… जब संसद के केंद्रीय कक्ष में अर्ध रात्रि को विशेष सत्र का आयोजन किया गया…

  1. 14 अगस्त 1947 में केंद्रीय कक्ष में देश की आजादी से पहले आधी रात को पहला विशेष सत्र बुलाया गया था।
  2. दूसरा सत्र 14 अगस्त 1972 को आजादी की रजत जयंती पर आयोजित किया।
  3. भारत की आजादी की 50 वीं वर्षगांठ पर 14 अगस्त 1997 को विशेष सत्र का आयोजन किया गया।
  4. विशेष सत्र का चौथा आयोजन देश में आर्थिक आजादी के लिए जाना जाएगा।

30 जून की मध्य रात्रि को आयोजित संसद के विशेष सत्र में महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जी एवं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने एक बटन दबाया, और देश ने एक नए आर्थिक युग में प्रवेश किया।

राष्ट्रपति जी ने कहा कि GST लंबी चर्चा के बाद लागू हुआ है। सम्मिलित व सतत प्रयास का ही परिणाम है, कि हम आज GST को सपने से साकार होता हुआ देख रहे हैं। 2009 में वित्तमंत्री के तौर पर GST के मूल ढांचे की घोषणा करने वाले श्री मुखर्जी ने आगे कहा कि आज GST एक प्रकार से सभी राज्यों के मोतियों को एक धागे में पिरोने का काम कर रहा है।

माननीय प्रधानमंत्री जी ने सभी राजनीतिक दलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा…

GST… Good & Simple Tax है।

GST की 18 बैठकों की तुलना, उन्होंने गीता के 18 अध्यायों से करते हुए कहा…
सरदार पटेल 1947 में 500 रियायतों को मिलाकर एक किया था और आज GST से देश के 29 राज्यों व 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 500 से ज्यादा टैक्सों का विलय हो जाएगा।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने GST पर बनी उच्चाधिकार समिति GST Council के अध्यक्ष व पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री रहे कम्युनिस्ट नेता असीम दासगुप्ता की चर्चा करते हुए कहा, कि अब 17 करों की जगह एक कर लगेगा।

कांग्रेस (INC), तृणमूल कांग्रेस (TMC), वामदलों  (CP) ने विशेष सत्र में हिस्सा नहीं लिया। राजनीतिक कारणों से कांग्रेस व अन्य विरोधी दलों ने विशेष सत्र का बहिष्कार कर कोई अच्छा संदेश नहीं दिया। UPA शासन में प्रधानमंत्री रहे डॉ.मनमोहन सिंह जी को इस मौके पर खासतौर पर बुलाया गया था।

जिन मनमोहन जी को लेकर कांग्रेस देश में आर्थिक सुधार लागू करने की दावा करती रही है, उनकी गैरहाजिरी भी लोगों को अखरी है। विरोधी दलों का विरोध केवल विरोध करने के लिए ही है। संसद में बुलाए गए मध्यरात्रि सत्र का बहिष्कार करने का कांग्रेस का फैसला, एक दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है।

जब देश एक ऐतिहासिक कर सुधार की तरफ आगे बढ़ रहा है, ऐसे में बहिष्कार करने से कांग्रेस की मंशा पर ही सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस को बहिष्कार के फैसले पर भविष्य में जनता को जवाब भी देना होगा। माननीय प्रधानमंत्री जी ने खुले मन से GST के लिए सभी दलों की तारीफ की।

उनका यह कहना, कि किसी की भी या कहीं की भी सरकार हो, लेकिन सभी ने GST में आम लोगों के हितों का ध्यान रखा है, जिन-जिन लोगों ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, मैं उन सभी को बधाई देता हूं। प्रधानमंत्री जी ने सभी दलों को GST के लिए श्रेय दिया… किन्तु लगता है… कांग्रेस को लग रहा है कि आर्थिक क्रांति का श्रेय केवल मोदी सरकार को जा रहा है।

GST 70 साल में सबसे बड़ा कर सुधार है।
जीएसटी को लेकर जो लोग विरोध कर रहे हैं, उनकी आशंकाएं निराधार हैं। कहा जा रहा है कि इससे वस्तुएं और सेवाएं महंगी हो जाएंगी। लोगों का बजट बिगड़ जाएगा। GST से किसी को डरने की कोई जरूरत नहीं है। इस नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के लागू होने पर शुरुआत में आने वाली दिक्कतों से बचाने के लिए सरकार की तरफ से कदम उठाए गए हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि उद्योग, व्यापार और आम लोगों को इससे फायदा ही होगा। GST का मकसद ‘कर पर कर’ को खत्म करना है। करों का बोझ धीरे-धीरे कम ही होगा। GST के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाएगा।

पहले राज्य और केंद्र सरकारें अलग-अलग टैक्स लगाती थीं। अब उपभोक्ताओं को सिर्फ एक टैक्स देना होगा। इस टैक्स में राज्य और केंद्र सरकार का अपना-अपना हिस्सा होगा। GST हर सेवा पर नहीं लागू होगा। माना जा रहा है, कि GST से केवल उन लोगों को ज्यादा परेशानी होगी जो कर देने से बचते रहे हैं।

वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली जी ने भी कहा है,
पहले भी कर नहीं देते और अब भी नहीं देंगे का चलन अब पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
कर चोरी रोकने के लिए फ्रांस ने 1954 में सबसे पहले GST लागू किया था। GST में कर चोरी पर सबसे ज्यादा रोक लगेगी। यही कारण है कि कर चोरी रोकने के लिए 160 से ज्यादा देशों में जीएसटी/ वैट लागू है।

Goods & Services Tax के तहत खुले अनाज, गुड़, दूध, अंडे और नमक जैसी बहुत-सी आवश्यक वस्तुओं पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। GST प्रणाली के तहत देशभर में एक वस्तु पर एक ही दर से कर लगेगा। इस नई व्यवस्था में उत्पाद शुल्क, सेवाकर, मूल्य वर्धित कर (वैट) सहित केंद्र और राज्यों में लगाए जाने वाले 17 विभिन्न कर समाहित कर दिए गए हैं।

पेट्रोल,डीजल, रसोई गैस और शराब पर कर से  राज्यों को ज्यादा राजस्व मिलता है। इनको अभी GST के दायरे से बाहर रखा गया है। इन उत्पादों पर पहले की तरह ही टैक्स लगेंगे। शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं जीएसटी से पूरी तरह बाहर रखा गया हैं।

जिन व्यापारियों का सालाना कारोबार 20 लाख रुपए तक का है वह GST के दायरे में नहीं आएंगे।  पूर्वोत्तर और विशेष दर्जा वाले राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर,उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में यह सीमा 10 लाख रुपए है। ऐसे व्यापारियों को GST का पंजीकरण करने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी रिफंड का फायदा मिलेगा।

एक से दूसरे राज्य में कारोबार करने वालों को जीएसटी का पंजीकरण कराना होगा। GST से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। मोदी सरकार का मकसद करों का बोझ कम कर ज्यादा से ज्यादा राजस्व जुटाना है। बिना आर्थिक मजबूती के कोई देश सुरक्षित नहीं रह सकता है। जब देश सुरक्षित नहीं होगा तो विकास में तेजी से आगे नहीं बढ़ सकता है।

देश की सुरक्षा के लिए सेना को मजबूत करना बहुत जरूरी है। हमारे देश का पड़ोसी देशों से लगातार टकराव चल रहा है। चीन और पाकिस्तान से हमें लगातार धमकियां मिल रही हैं। चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को रोकते हुए 1965 के युद्ध की याद दिलाई है। केंद्र सरकार ने रक्षा के महत्व को देखते हुए ही पिछले बजट में 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी की। कुल बजट का 12.78 प्रतिशत रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित किया गया। बजट में रक्षा क्षेत्र में 2.74 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए। यह कुल बजटीय राशि 21.47 लाख करोड़ रुपये का 12.78 प्रतिशत है।

सेनाओं के आधुनिकीकरण की मांगों और जरूरतों के हिसाब से इस क्षेत्र के बजटीय आवंटन में बढ़ोतरी की गई। UPA सरकार के दस सालों में सेनाओं के लिए इतना बजट नहीं दिया गया। यूपीए के राज में तो रक्षा सौदे घपलों के कारण विवादों में ही रहे। अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों की खरीद को लेकर CAG की रिपोर्ट कई गड़बड़ियों का खुलासा किया गया था।

3 साल के दौरान मोदी सरकार पर किसी तरह का कोई दाग नहीं लगा है। सरकार की कोशिश है कि देश की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित रहें। कई वर्षों की देरी के बाद भारत सरकार ने सेनाओं की मजबूती के लिए काम शुरु किया है। थल सेना, वायु सेना और नौसेना के लिए तमाम अत्याधुनिक उपकरण और हथियारों की खरीद प्रक्रिया शुरु हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनकी पहली मुलाकात से ठीक पहले अमेरिका ने भारत को 22 गार्जियन मानवरहित ड्रोन की बिक्री को मंज़ूरी दी है। सेना की सभी जरूरतें, तभी पूरी हो पाएंगी, जब हमारे देश का खजाना भरा हो।

तो, जैसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा कि…

GST… गुड और सिंपल टैक्स है, इससे घबराने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है।

 

#KailashVijayvargiya

 

नया इंडिया पर प्रकाशित मेरा यही लेख –
http://www.nayaindia.com/infocus/parliament-central-hall-gst-launch.html

MODI-fied INDIA! – Three years of BJP Regime

Three years ago, with a sweeping majority, India voted for One Party- BJP and India counted on One Name – Narendra Modi. After three big years, with a huge progress in almost every sector and further continued efforts, Bharatiya Janata Party has proved that it won’t let India down!

No effort has been left undone to improve our relations with the rest of the world and prove to them that we strictly believe in a policy of ‘Vasudeva Kutumbhkam’! From the Madison square speech that took Indian-Americans into confidence, to ensuring that our closest neighbours don’t take us for granted- by countering terrorism, We stand on firm grounds globally!

Talking about

Advancements in Infrastructure – by

  1. Schemes like PMGSY– where for connecting the nation, roads are being built at a much faster pace than before
  2. Inauguration of the country’s longest river bridge in the North- East (Bhupen Hazarika Bridge)- that will reduce travel time by at-least four hours.

Advancements in Financial Sector – by

  1. Attracting FDIs wherein foreign inflows have increased by a significant level of $13Bn
  2. Lowering of Fiscal Deficit, Current Account Deficit and Inflation.
  3. India has even marked a better position in Ease of Doing Business (Currently, India ranks 130th out of 190 economies in Ease of Doing Business (EoDB) as per Doing Business Report, 2017 http://eodb.dipp.gov.in.).

Advancements in Manufacturing Sector

  1. EoDB is just another roar of the Make In India Lion, wherein there have been unprecedented efforts in various states
  2. Obtaining utility permits (for water and electricity) has smoothened up
  3. Registration and Incorporation of companies has speeded up (the concept of minimum paid –up capital has been done away with)
  4. Dept. of Industrial Policy and Promotion has integrated processes
  5. online portals (ESIC and EPFO) have been established with load-handling servers.
  6. States are to be ranked on 405 business process reforms right from labour regulation, procuring credit to land availability and allocation- registering property.  

Advancements in Employment Sector – No stone has been left unturned

  1. Creating employment opportunities by focus on Self Employment
  2. Fascinating Foreign Investors to the establishment of portals such as e-Biz. http://www.makeinindia.com/home   (Visualisation – Pictures of Make In India- lion may be added or a collage of Make in India, startup India, demonetisation etc)
  3. One can’t afford to miss out on the start-ups that have revolutionised India with instilled innovation and a seamless potential to develop products and services for greater wealth creation.
  4. All this has happened in the wake of Start-Up India and its encouraging Tax benefits. (http://startupindia.gov.in/)
  5. Talking about Taxes, GST- “Goods and Service Tax”, is finally ready in black and white to be implemented after “Gahri Samajh of Taxes!” This will not just fill our treasuries with greater tax compliance but will also give a huge boost to our commerce and industry.

Advancements in Removing Redundant Acts

  1. A step to reduce procrastination of necessary laws and another one to withdraw useless Acts was the need of the hour.
  2. Benami Transactions Prohibition Act, RERA and unifying the AADHAAR CARD with PAN and the Landmark law on Maternity Leave are just some of the examples.

Considering these measures, BJP’s and in turn India’s growth chart stands upward and rising.  

Plus, how can anyone forget the Historic Decision of Demonetisation? Calling it a strategy that pulled the chair before the Black Money Maaliks could even settle in, would be much relatable!

India persevered and some even lost patience but when the other political parties merely talked of ending Corruption. BJP, just like always, made Actions Speak Louder Than our Words.

Going further & personal, Indore is my hometown, but who could have imagined five years ago, that one day my city would turn into India’s Cleanest City, these are the results of pan India Swachh Bharat Abhiyan, which is not just a campaign – but a promise to keep our surroundings clean. http://swachh.mp.gov.in/

And these are just glimpse of the overall work that’s done, being done & will be done. If we go on, writing about it, even 1000 pages will be less to accommodate. You can read some more of them here  http://www.bjp.org/modiat3

“Sab ka Saath, Sab ka Vikaas”

Last, but not the least, the motivation of a leader like Narendra Modi Ji, comes from the principles of the party. Bharatiya Janata Party stands apart from all its counterparts with strong thought process, policies & vision. Thus, taking every Indian together for creating a better India, is not ideology of a single person, but every single Karykarta of BJP.

The biggest achievement I see here of Modi government here is the connection of Indian youth with politics, which didn’t existed in this ample amount. Indian youth has joined the bandwagon, & with world’s biggest youth force, Modi government is making & will continue to make Dreams of विश्वगुरु भारत come True!

🇮🇳 भारत माता की जय 🇮🇳

A Wake up call to the Police Administration

Police-force of West Bengal has repeatedly demonstrated professional inefficiency. They haven’t lived up to the expectation whenever required. They haven’t been able to do their job when goons of the ruling party has often heckled the policemen. Such hooligans under the protection of TMC have been reported to attack even police stations. Few months back, a media shot went viral where a policeman was seen to hide under the table, protecting himself with a mere paper file. Don’t these incidences prove that our policemen are either not empowered & equipped to protect  themselves or they have to comply with the instruction of their Minister to admit such hooliganism under the banner of TMC?  In either case, do people of West Bengal have any reason to have faith on its police force? Can the police force, which can’t protect themselves, protect common men? Can’t this situation be described as administrative failure of the Home Ministry led by the Chief Minister of West Bengal? And if a State doesn’t keep its policemen empowered, well-trained & efficient, would it be wrong to say that the State doesn’t have a normal Law n’ Order status?

Breaking of rows are common phenomenon in districts, villages & different parts of West Bengal. In almost each incident, the police force either remains inactive or become oppressive on the relatively weaker section of the people involved in the row, leading to a general lack of faith & reverence about police force. This type of an image of police force is a shame for the State and for all of us as the people of the State.

Shameful incidents like rape & violence on women have observed a monotonous increase in TMC regime in West Bengal. As an example, even a 70 years old Nun of a Christian Missionary School at Ranaghat, Nadia district, was not exempted by the rapists’ gang. They raped her as she didn’t want to comply with their illegitimate demand of money from the School. What an unbearable shame for ALL of us! Our Chief Minister who is also the Home Minister, is unable to control situations in general; instead, she prefers to declare compensation for the family of the rape-victim. The respectable Minister has tried to pay the price of all the misdeeds of her party-men, be it a rape, a gang-rape, a murder, hooliganism or anything at the cost of the money of Government-treasury i.e.public-money. The oppressed people also had no other way but to accept the compensation due to definite practical reasons, I guess. Common men are too weak to withstand threats of the Government supported hooligans. So in our state now, every abstract human possessions are perceived to be purchasable, be it human-life, prestige, respect to women or anything of that sort! Is this anything less than a hell? The police is just titular! They have to be just the yes-men to the Home Minister! If they approach to say & do anything otherwise, they are removed to a relatively defunct job-posting, as happened to Ms. Damayanti Sen, IPS, after she truthfully investigated the infamous rape-case of Park Street and declared that the girl was ill-treated & raped by some rich anti-socials as against the statement of the Chief cum Home Minister that it was a mere ‘made-up incident’!

In incidences when any type of resistance has been shown from people of opposition parties against TMC-goons, local police force has invariably acted favourably for the TMC-men. Is it quite rational & logical to believe that the opposition-men were always illegitimate as against the ruling-party men? However, police has almost never stood up for justice, instead they filed false cases against opposition men as a matter of strategy to suppress opposition-activity. Can this be called a healthy democracy where oppositions are not allowed to act upon their own political agenda? Policemen has turned, from public-servants, to TMC-servants! What a shame!

The other severe problem to the State-conditions of West Bengal is terror-infiltration across the international border between West Bengal & Bangladesh, as officially reported by Bangladesh. We are very alarmed and concerned to know what steps have been taken by the Police and the Government of  West Bengal, otherwise, Bengal-border is acting as the big open gate of terror infiltration into the land of India making the whole country vulnerable! We as residents of West Bengal can’t take the burden of being responsible for unwanted terror activities in our dear country.

There are several reasons why common men in common places are often expressing their disgust about policemen these days. Police force of Bengal always had an image of being corrupt even earlier. But at the same time, they had an image of strength too. In TMC regime, police force has lost its image of strength. No one is afraid of the police these days in West Bengal as they believe police to be completely unable & ineffective to tackle any situation of unrest. And this is why, people of the State are living with a persistent sense of insecurity too, as they don’t expect any help from the police force in case they fall in some trouble! Inherent & imparted weakness of the police force of the State is leading to a dangerous & fearful law n’ order status of West Bengal in near future!

We, as a responsible opposition party of the State, feel it to be necessary to appeal to the police administration to wake up from hibernation & take control of the lawful governance of the State as stated in our Constitution. We request the police force to do their duties. With all these agenda, we have decided to march ahead towards Lalbajar, the Head Quarter of Kolkata Police, with a rally of people on 25th May, Thursday, 2017.

नमो विजय दिवस

स्वाधीन भारत के इतिहास में आप देखेंगे कि नेतृत्व की सफलता के मुख्य कारक नेता का कर्म के प्रति पूर्ण समर्पण, कड़ी मेहनत एवं लगन के साथ दूरदृष्टा होना रहा है। विरले ही ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने इन विशेषताओं पर अधिकार बनाया है। श्री नरेन्द्र मोदी इन सब विशेषताओं से परिपूर्ण व्यक्तित्व हैं एवं उन्हें अपने कर्म के प्रति ध्यान केंद्रित करना बखूबी आता है। वे आसमान को छूने की बात भी करते हैं लेकिन उनके पैर हमेशा जमीन पर रहते है। इन सब गुणों के कारण श्री नरेन्द्र मोदी एक असाधारण नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण व्यक्तित्व हैं।

साल 1950 में वडनगर गुजरात में बेहद साधारण परिवार में जन्‍मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले 12 वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात में अभूतपूर्व एवं समग्र विकास किया, और वही देखकर, तीन वर्ष पूर्व आज ही के दिन उन्हें जनता-जनार्दन ने पूरे देश की कमान सौंप दी..

नरेन्द्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और वे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म आज़ादी के बाद हुआ है। ऊर्जा-वान, समर्पित एवं दृढ़ निश्चय वाले नरेन्द्र मोदी एक अरब से अधिक भारतीयों की आकांक्षाओं और आशाओं के द्योतक हैं।

मई 2014 में अपना पद संभालने के बाद से ही प्रधानमंत्री मोदी चहुंमुखी और समावेशी विकास की यात्रा पर निकल पड़े हैं जहां हर भारतीय अपनी आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा कर सके। वे ‘अंत्योदय’, अर्थात, अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने के सिद्धांत से अत्यधिक प्रेरित हैं।

नवीन विचारों और पहल के माध्यम से सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रगति की रफ्तार तेज हो और हर नागरिक को विकास का लाभ मिले। अब शासन मुक्त है, इसकी प्रक्रिया आसान हुई है एवं इसमें पारदर्शिता आई है।

श्री नरेन्द्र मोदी देश के एकमात्र ऐसे नेता है जिन्होंने आम जनता से न केवल राजनैतिक रिश्ता विकसित किया है अपितु एक भावनात्मक लगाव स्थापित किया है। उनके प्रशंसक न केवल भारत में हैं अपितु कई अन्य देशों में भी श्री मोदी असंख्य प्रशंसक मौजूद हैं। साथ ही समाज के हर वर्ग, स्त्री एवं पुरुष, शहरी एवं ग्रामीण, अमीर एवं गरीब, बुद्धिजीवी वर्ग सभी में श्री नरेन्द्र मोदी का अपना स्थान है। विदेशों में रहने वाले कई अनिवासी गुजराती उन्हें सम्मान देते हैं। श्री नरेन्द्र मोदी ने जनता से सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से सूचना प्रोद्योगिकी का अनूठा उपयोग किया है एवं इसके माध्यम से देश का युवा वर्ग बड़ी संख्या में श्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व से प्रभावित हुआ है।

वे साहस, करुणा और विश्वास से पूर्ण एक ऐसे व्यक्ति हैं जिसे देश ने इस विश्वास के साथ अपना जनादेश दिया है कि वे भारत का पुनरुत्थान करेंगे और उसे दुनिया का पथ–प्रदर्शक बनाएंगे।

“इबार बंगला ”- अबकी बार पश्चिम बंगाल

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह संगठन को मजबूत बनाए रखने हेतु लगातार दौरे कर रहे हैं और अभी भी वे तीन दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल प्रवास पर थे।

पश्चिम बंगाल विधानसभा सीटों के लिए हुए उप-चुनाव के नतीजों में भाजपा का वोट प्रतिशत भारी संख्या में बढ़ा है। राष्ट्र विरोधी ताक़तों को संरक्षण व वोट बैंक की राजनीति करने वाली तृणमूल सरकार ख़िलाफ़ लोगों में गुस्सा है और वे अब भाजपा में ही अपना विकल्प ढूंढ रहे हैं।

25 अप्रैल –

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जी  ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी के एक छोटे गांव से पार्टी के विस्तार अभियान का शुभारंभ किया। इसी इलाके से 1960 के दशक के आखिरी बरसों में वामपंथी उग्रवाद शुरू हुआ था।

श्री अमित शाह ने मंगलवार को दार्जीलिंग जिले में एक आदिवासी परिवार के घर पर दोपहर का भोजन किया। शाह ने नक्सलबाड़ी इलाके के दक्षिण कटियाजोत गांव में राजू महाली के घर भोजन किया, एक सामान्य से दिखने वाले परिवार का आतिथ्य, प्रेम और उत्साह से भरपूर था।अमित शाह जी के साथ पश्चिम बंगाल भाजपा के सभी बड़े कार्यकर्ता मौजूद रहे।

जिसके उपरांत श्री अमित शाह ने बूथ नंबर. 93 में माँ भारती, श्री श्यामा प्रसाद मुख़र्जी एवं पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के चरणों में वंदन कर, कार्यकर्ताओं की बैठक ली। माननीय अमित शाह जी ने इंदूर स्टेडियम, सिलीगुड़ी में जनता को संबोधित भी किया।  

नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र की स्थिति अत्यंत ही दयनीय है; जहाँ देखो वहां केवल गरीबी ही नज़र आती है। जनता की माने तो तृणमूल नेता वादे तो काफी बड़े बड़े करते  है, जब वो वोट मांगने आते  हैं। परन्तु उसके बाद कभी दिखाई नहीं देते। यहाँ इन ग़रीबों की समस्याओं को सुनने वाला यहाँ कोई नहीं हैं।

26 अप्रैल –

श्री अमित शाह न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं से मिले बल्कि उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों से भी सहर्ष भेंट की।

जब मैने पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में, माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी के साथ बूथ कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और इसके साथ ही क्षेत्र के निवासियों से घर-घर जाकर भेंट की तो इस दौरान यह देखकर बहुत दुःख, अफ़सोस तथा रोष हुआ कि…

ममता बनर्जी, जो कि बंगाल की मुख्यमंत्री और भवानीपुर की विधायक भी हैं,

उनके खुद के क्षेत्र में महिलाओं और बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएँ तक यहाँ उपलब्ध नहीं है।

भवानीपुर की जनता सरकार की अनदेखी से त्रस्त आ चुकी है। जहाँ भी गया वहां पर समस्याओं का अंबार देखने और सुनने को मिला। तृणमूल सरकार केवल तुष्टिकरण की राजनीति करने व्यस्त है, उन्हें जनता की कोई प्रवाह नहीं है। अगर मुख्यमंत्री के स्वयं के क्षेत्र की यह दुर्दशा है तो आप पूरे राज्य का अनुमान लगा पा रहे होंगे।  

27 अप्रैल –

न्यू टाउन, राजारहाट, कोलकाता में हमने माननीय अमित शाह जी के साथ घर घर जा जाकर रहवासियों से मुलाक़ात की…साथ ही हम सभी के प्रेरणास्त्रोत… शिक्षाविद्, चिन्तक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी के निवास स्थान “आशुतोष मुखर्जी स्मारक संस्थान” में माननीय अमित शाह जी के साथ जाने का अवसर प्राप्त हुआ।

पार्टी इस साल दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती वर्ष मना रही है और इस साल को पार्टी ने विस्तार कार्यक्रम के रूप में भी मनाने का फैसला किया है। जिसकी शुरुआत पश्चिम बंगाल से की गई; जहाँ राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी के 3 दिनों के प्रवास में बीजेपी की विचारधारा, गरीब कल्याण की प्रतिबद्धता और सबका साथ, सबका विकास नारे के बारे में लोगों को बताया ।